Canada- कनाडा का बड़ा बयान, जंग से पीछे नहीं हटेंगे, पीएम Mark Carney का ऐलान

By Anuj Kumar | Updated: March 5, 2026 • 1:04 PM

ओटावा,। कनाडा के प्रधानमंत्री (Mark Carney) ने मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ओटावा में गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए प्रधानमंत्री कार्नी ने स्पष्ट किया कि (United States) और Israel द्वारा (Iran) के खिलाफ चलाए जा रहे युद्ध में कनाडा की सैन्य भागीदारी की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि हालात युद्ध जैसे बने तो कनाडा पीछे नहीं हटेगा।

युद्ध को लेकर कनाडा का सख्त रुख

मार्क कार्नी की यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले उन्होंने एक बयान में कहा था कि संघर्ष को जन्म देने वाले कुछ अमेरिकी-इजरायली हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे से बाहर प्रतीत होते हैं। हालांकि अब उनके रुख में आया यह बदलाव क्षेत्र में तेजी से बदलती सैन्य परिस्थितियों की ओर इशारा कर रहा है।

ईरान पर लगाए गंभीर आरोप

ईरान के प्रति अपनी सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए कार्नी ने कहा कि मध्य पूर्व में अस्थिरता और आतंकवाद का मुख्य स्रोत ईरान ही है। उन्होंने ईरान के मानवाधिकार रिकॉर्ड की कड़ी आलोचना करते हुए जोर दिया कि उसे किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार विकसित करने या प्राप्त करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ता दबाव

कार्नी के अनुसार कनाडा और उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदार लगातार ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने का आग्रह कर रहे हैं। उन्होंने United Nations द्वारा पिछले वर्ष फिर से लागू किए गए कड़े प्रतिबंधों और G7 शिखर सम्मेलन की चर्चाओं का हवाला देते हुए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

ऑस्ट्रेलिया के साथ साझा बयान

कैनबरा में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री Anthony Albanese के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी कार्नी ने इसी तरह का एकजुट रुख दिखाया। दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व में बढ़ती शत्रुता को कम करने की अपील की, लेकिन साथ ही ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया।

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पश्चिमी देशों की रणनीति में बदलाव के संकेत

कनाडा के इस कड़े रुख से संकेत मिल रहे हैं कि यदि ईरान और इजरायल के बीच तनाव और अधिक बढ़ता है, तो कनाडाई सेना पश्चिमी गठबंधन के साथ मिलकर प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई का हिस्सा बन सकती है। यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में पश्चिमी देशों की रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।

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