‘बोर्ड ऑफ पीस’ का न्योता रद्द
वाशिंगटन: दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान अमेरिका(America) और कनाडा(Canadian PM) के बीच दशकों पुराने रिश्तों में दरार आती दिख रही है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा अमेरिकी दबदबे को लेकर दिए गए बयान से नाराज होकर डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से बाहर कर दिया है।
विवाद की जड़: “अमेरिकी दबदबे का अंत” वाला बयान
विवाद की शुरुआत तब हुई जब कनाडाई पीएम मार्क कार्नी ने दावोस में कहा कि “अमेरिका के दबदबे वाली वैश्विक व्यवस्था(Global Settings) अब खत्म हो चुकी है।” उन्होंने अमेरिकी टैरिफ नीति की आलोचना करते हुए इसे एक ‘हथियार’ बताया जो दुनिया(Canadian PM) को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम कर रहा है। कार्नी ने जोर दिया कि देशों को अपनी सुरक्षा, ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति के लिए किसी एक देश (विशेषकर अमेरिका) पर निर्भरता कम करनी चाहिए। इस बयान ने ट्रम्प को सीधा चुनौती दी, जिन्होंने हमेशा “अमेरिका फर्स्ट” और अमेरिकी वर्चस्व की वकालत की है।
ट्रम्प की तीखी प्रतिक्रिया: “अमेरिका की वजह से टिका है कनाडा”
कार्नी के बयान पर पलटवार करते हुए डोनाल्ड ट्रम्प ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि कनाडा को अमेरिका से बहुत कुछ मुफ्त में मिलता है और उसे आभारी होना चाहिए। ट्रम्प ने दावा किया कि कनाडा केवल अमेरिका(Canadian PM) की वजह से ही आर्थिक रूप से जीवित है। गुस्से में आकर ट्रम्प ने कार्नी को भेजा गया ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का निमंत्रण सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर वापस ले लिया। इसके जवाब में कार्नी ने स्पष्ट किया कि कनाडा अमेरिका की दया पर नहीं, बल्कि अपनी कनाडाई पहचान और मेहनत के दम पर फल-फूल रहा है।
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‘बोर्ड ऑफ पीस’ और वैश्विक दूरी
ट्रम्प ने दावोस में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को आधिकारिक रूप से लॉन्च तो कर दिया, लेकिन इसे उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिला। 60 आमंत्रित देशों में से केवल 20 देश ही समारोह में पहुंचे। जहां 8 प्रमुख इस्लामिक देशों (कतर, तुर्किये, पाकिस्तान, सऊदी अरब आदि) ने इसमें शामिल होने पर सहमति जताई, वहीं भारत और अधिकांश यूरोपीय देशों(Canadian PM) ने इस समारोह से दूरी बनाए रखी। 1 अरब डॉलर के अनिवार्य योगदान और ट्रम्प को मिलने वाली वीटो शक्तियों के कारण कई देश इस बोर्ड को वैश्विक कूटनीति के लिए जोखिम भरा मान रहे हैं।
मार्क कार्नी ने वैश्विक आत्मनिर्भरता को लेकर क्या महत्वपूर्ण बात कही?
मार्क कार्नी ने कहा कि जो देश खुद का पेट नहीं भर सकता, अपनी ऊर्जा की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता और अपनी रक्षा खुद नहीं कर सकता, उसके पास वैश्विक मंच पर बहुत कम विकल्प बचते हैं। उन्होंने देशों को किसी एक महाशक्ति पर निर्भरता खत्म करने की सलाह दी।
‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत और यूरोपीय देशों के शामिल न होने का क्या अर्थ निकाला जा रहा है?
भारत और यूरोपीय देशों की अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि वे संयुक्त राष्ट्र (UN) के ढांचे के बाहर ट्रम्प की इस निजी कूटनीतिक पहल को लेकर सशंकित हैं। 1 अरब डॉलर का भारी योगदान और बोर्ड की अपारदर्शी शक्तियां भी बड़े देशों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
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