सस्ती छपाई से अमेरिका-ब्रिटेन का बाजार प्रभावित
वाशिंगटन: भारत के कई पड़ोसी और एशियाई देश अब अपनी करेंसी प्रिंटिंग के लिए चीन(China) की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका मुख्य कारण चीन की सस्ती छपाई लागत और उन्नत तकनीक है। हाल ही में, नेपाल राष्ट्रीय बैंक (NRB) ने 1000 रुपए के 43 करोड़ नोटों की छपाई का टेंडर चीन की चाइना बैंक नोट प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन (CBPMC) को दिया है।
चीन पर निर्भर देश: नेपाल (2015 से), श्रीलंका (2015 के बाद से), बांग्लादेश (2010 से), थाईलैंड (2018 से), और मलेशिया (2010 के बाद से) जैसे भारत के पड़ोसी देश अपनी मुद्रा चीन में छपवा रहे हैं।
आर्थिक और तकनीकी लाभ: चीन(China) का CBPMC दुनिया का सबसे बड़ा मुद्रा प्रिंटर है और यह 30-40% कम लागत पर छपाई करता है। उदाहरण के लिए, नेपाल ने 2016 में अमेरिकी फर्मों की तुलना में 1000 रुपए के नोट छापने पर $3.76 मिलियन बचाए थे।
चीन की ‘कोलोरडांस’ तकनीक और सुरक्षा
ज्यादातर एशियाई देशों के चीन(China) की ओर मुड़ने का एक बड़ा कारण उसकी ‘कोलोरडांस’ तकनीक है। यह तकनीक करेंसी नोटों की सुरक्षा को बढ़ाने वाला एक ऑप्टिकल एंटी-काउंटरफिटिंग फीचर है।
सुरक्षा विशेषता: ‘कोलोरडांस’ तकनीक नोट पर बहुत छोटे माइक्रो-नैनो स्ट्रक्चर्स का उपयोग करती है, जिससे नोट को झुकाने या घुमाने पर 3D मार्क दिखाई देते हैं।
नकली नोटों की रोकथाम: इस तरह के जटिल निशान को नकली नोटों में उतारना बहुत मुश्किल होता है। मलेशिया जैसे देशों ने पॉलीमर-आधारित नोटों की छपाई के लिए चीन को चुना है, जिससे नकली नोटों की संख्या में 50% तक कमी आई है।
पाकिस्तान और म्यांमार: जहाँ पाकिस्तान अपनी घरेलू प्रेस में प्रिंट करता है, वहीं उसने तकनीकी सहायता के लिए चीन से सहयोग लिया है। म्यांमार ने भी 2020 के तख्तापलट के बाद चीन पर अपनी निर्भरता बढ़ाई है।
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पश्चिमी मुद्रा प्रिंटिंग बाजार पर प्रभाव
चीन(China) के आक्रामक और कम लागत वाले मुद्रा प्रिंटिंग मॉडल का अमेरिका और ब्रिटेन के पारंपरिक करेंसी प्रिंटिंग बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
बाजार पर असर: चीन की कीमतें पश्चिमी देशों की तुलना में 50% तक कम हैं, जबकि गुणवत्ता समान है। इससे विकासशील देश पश्चिमी कंपनियों से दूर हो रहे हैं।
भविष्य की चुनौती: अगर यह रुझान जारी रहता है, तो अमेरिका और ब्रिटेन की मुद्रा छापने वाली कंपनियों को अपनी कीमतों में कमी करनी होगी या पॉलीमर नोट्स जैसी नई तकनीकों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा।
भारत पर निर्भरता: हालांकि, भूटान अभी भी अपनी मुद्रा के लिए भारत की नासिक स्थित सिक्योरिटी प्रेस पर निर्भर है।
नेपाल ने करेंसी प्रिंटिंग के लिए चीन का रुख क्यों किया, और इस निर्णय से नेपाल को क्या वित्तीय लाभ हुआ?
नेपाल ने मुख्य रूप से कम लागत और चीन की उन्नत ‘कोलोरडांस’ तकनीक जैसे आर्थिक और तकनीकी लाभों के कारण चीन का रुख किया। वित्तीय लाभ की बात करें तो, नेपाल ने 2016 में 1000 रुपए के नोट छापने के लिए चीन की कंपनी चुनने पर अमेरिकी फर्मों की तुलना में $3.76 मिलियन की बचत की थी।
चीन की ‘कोलोरडांस’ तकनीक क्या है और यह करेंसी नोटों की सुरक्षा में कैसे मदद करती है?
‘कोलोरडांस’ चीन द्वारा विकसित एक ऑप्टिकल एंटी-काउंटरफिटिंग फीचर है। यह नोट पर माइक्रो-नैनो स्ट्रक्चर्स का उपयोग करती है। यह नोट को झुकाने या घुमाने पर 3D मार्क दिखाती है, जिससे नोटों की नकल करना (नकली नोट बनाना) बहुत मुश्किल हो जाता है और सुरक्षा बढ़ जाती है।
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