जिनपिंग की ‘एकीकरण’ की हुंकार और अमेरिका की सख्त चेतावनी
बीजिंग: चीनी(China) राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नए साल के संबोधन में ताइवान के साथ एकीकरण को “ऐतिहासिक अनिवार्यता” बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन और ताइवान(Taiwan) के बीच “खून का रिश्ता” है जिसे कोई अलग नहीं कर सकता। अपनी इस मंशा को मजबूती देने के लिए चीन ने दिसंबर 2025 के अंत में “जस्टिस मिशन 2025” नामक एक विशाल युद्धाभ्यास किया। इसमें चीन की नौसेना, वायुसेना और रॉकेट फोर्स ने ताइवान को चारों तरफ से घेरने और उसके प्रमुख बंदरगाहों की नाकाबंदी करने का अभ्यास किया। चीनी सेना का कहना है कि यह ‘अलगाववादी ताकतों’ और बाहरी हस्तक्षेप के लिए एक सीधी चेतावनी है।
अमेरिका की हथियार डील और चीन की जवाबी कार्रवाई
इस तनाव की एक मुख्य वजह अमेरिका और ताइवान के बीच हुआ 11.1 अरब डॉलर का रक्षा सौदा है। यह अब तक का सबसे बड़ा हथियार(Big Weapon) पैकेज है, जिसमें आधुनिक मिसाइल सिस्टम और रॉकेट(China) लॉन्चर शामिल हैं। चीन इस डील को अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है। इसके जवाब में चीन ने अमेरिका की 20 रक्षा कंपनियों और 10 वरिष्ठ अधिकारियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने चीन को आगाह किया है कि वह बल प्रयोग के जरिए यथास्थिति बदलने की कोशिश न करे, क्योंकि इससे पूरे क्षेत्र की शांति भंग हो सकती है।
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ट्रम्प का ‘दोस्ताना’ नजरिया और जापान का सख्त रुख
अमेरिकी राजनीति में ताइवान को लेकर दो अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। जहाँ विदेश विभाग सख्त है, वहीं पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जिनपिंग(China) को अपना “अच्छा दोस्त” बताते हुए कहा है कि चीन हमला नहीं करेगा। दूसरी तरफ, जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि चीन ने ताइवान पर हमला किया, तो जापान अपनी सेना मदद के लिए भेजेगा। जापान के इस बयान ने चीन को और अधिक नाराज कर दिया है, जिससे पूर्वी एशिया में शक्ति संतुलन को लेकर खींचतान बढ़ गई है।
चीन के हालिया सैन्य अभ्यास ‘जस्टिस मिशन 2025’ का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य ताइवान(China) के मुख्य द्वीप को पूरी तरह घेरना, उसके समुद्री बंदरगाहों की नाकाबंदी करना और यह दिखाना था कि चीन जरूरत पड़ने पर ताइवान को शेष दुनिया से काट सकता है।
चीन ने अमेरिकी रक्षा कंपनियों पर प्रतिबंध क्यों लगाए हैं?
चीन ने यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा ताइवान को 11.1 अरब डॉलर के आधुनिक हथियार बेचने के विरोध में की है। चीन किसी भी देश द्वारा ताइवान को सैन्य सहायता देने को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप मानता है।
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