अब श्रीलंका को दिया बड़ा ऑफर
कोलम्बो: श्रीलंका में तुर्की के राजदूत सेमिह लुटफू तुर्गुट ने आधिकारिक तौर पर श्रीलंकाई सेना को सैन्य ड्रोन(Drone Diplomacy) बेचने की पेशकश की है। अंकारा(Ankara) का तर्क है कि श्रीलंका अपनी विशाल समुद्री सीमा की सुरक्षा और अवैध तस्करी को रोकने के लिए इन निगरानी ड्रोनों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकता है। हालांकि श्रीलंका ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन तुर्की की यह पहल श्रीलंका के साथ रक्षा संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने की कोशिश है।
पड़ोसियों के बाद श्रीलंका पर नजर
तुर्की पहले ही भारत के तीन महत्वपूर्ण पड़ोसियों—पाकिस्तान, मालदीव और बांग्लादेश—को अपने घातक सैन्य ड्रोन बेच चुका है। मालदीव ने हाल ही में तुर्की के Bayraktar TB2 ड्रोन को अपनी समुद्री सीमा की रक्षा के लिए तैनात किया है। अब श्रीलंका को दिया गया यह ऑफर भारत के रणनीतिक हितों के लिहाज से चिंता का विषय(Drone Diplomacy) हो सकता है, क्योंकि तुर्की तेजी से दक्षिण एशिया में अपना रक्षा निर्यात नेटवर्क फैला रहा है। विशेषज्ञ इसे तुर्की की ‘ड्रोन डिप्लोमेसी’ के रूप में देख रहे हैं।
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व्यापार और रक्षा का बढ़ता गठजोड़
तुर्की और श्रीलंका के संबंध हाल के वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। श्रीलंका जहां लंबे समय से तुर्की को चाय का निर्यात करता रहा है, वहीं अब दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग(Drone Diplomacy) बढ़ रहा है। पिछले साल तुर्की के युद्धपोत का कोलंबो पहुंचना और अब ड्रोन का ऑफर मिलना यह दर्शाता है कि तुर्की खुद को हिंद महासागर में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना चाहता है। यदि यह सौदा सफल होता है, तो श्रीलंका को उन्नत तकनीक मिलेगी, लेकिन इसके साथ ही क्षेत्र में वैश्विक शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है।
तुर्की श्रीलंका को कौन सा ड्रोन दे सकता है और इसकी क्या खासियत है?
माना जा रहा है कि तुर्की ने Bayraktar TB2 ड्रोन की पेशकश की है। यह ड्रोन पूरी दुनिया में अपनी सटीक मारक क्षमता और उत्कृष्ट निगरानी क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। यूक्रेन, लीबिया और नागोर्नो-काराबाख के युद्धों में इसकी सफलता ने इसे एक वैश्विक ब्रांड बना दिया है। श्रीलंका इसका उपयोग विशेष रूप से समुद्री गश्त और तस्करी रोकने के लिए कर सकता है।
तुर्की की इस पेशकश का भारत के लिए क्या रणनीतिक महत्व है?
भारत के लगभग सभी प्रमुख पड़ोसी देशों (पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव और अब श्रीलंका) के साथ तुर्की के रक्षा सौदे भारत(Drone Diplomacy) के लिए सामरिक चिंता का विषय हैं। हिंद महासागर में तुर्की की बढ़ती पैठ भारत के ‘इन्फ्लुएंस’ को चुनौती दे सकती है। भारत हमेशा से अपने पड़ोसियों के साथ रक्षा सहयोग में अग्रणी रहा है, ऐसे में तुर्की का यह हस्तक्षेप क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
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