पेरिस । अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका और फ्रांस (America and France) के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा उनकी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों पर की गई टिप्पणी की कड़ी आलोचना की है। दक्षिण कोरिया दौरे के दौरान मैक्रों ने ट्रंप के बयान को अशालीन और स्तरहीन बताया।
पत्नी पर टिप्पणी से बढ़ा विवाद
दरअसल, यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब ट्रंप ने मैक्रों के साथ हुई एक फोन कॉल का जिक्र करते हुए उनका मजाक उड़ाया। उन्होंने दावा किया कि मैक्रों की पत्नी उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करतीं और एक वीडियो क्लिप का हवाला दिया, जिसमें ब्रिगिट मैक्रों विमान से उतरते समय उन्हें हल्का धक्का देती दिख रही थीं। इस पर मैक्रों (Macro) ने पहले इसे मजाक बताते हुए खारिज कर दिया था, लेकिन बाद में ट्रंप की टिप्पणी पर नाराजगी जाहिर की।
ईरान मुद्दे पर भी तकरार
ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ईरान को लेकर अमेरिका के नेतृत्व में चल रहे तनाव पर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आए हैं। ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र में फ्रांस से सहयोग की मांग की थी, जिस पर मैक्रों ने कहा कि फ्रांस युद्ध के बाद मदद कर सकता है। इस पर ट्रंप ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी कर दी। साथ ही, उन्होंने नाटो की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाते हुए उसे ‘कागजी शेर’ तक कह दिया।
फ्रांस में ट्रंप के बयान का विरोध
फ्रांस में ट्रंप की इन टिप्पणियों का व्यापक विरोध हुआ। नेशनल असेंबली की अध्यक्ष येल ब्रौन-पिवेट ने इसे स्तरहीन बताया, वहीं फ्रांस अनबाउड पार्टी के मैनुअल बॉम्पार्ड ने कहा कि राष्ट्रपति और उनकी पत्नी के बारे में इस तरह की टिप्पणी अस्वीकार्य है। फ्रांसीसी मीडिया ने भी इसे एक और विवादास्पद बयान करार दिया।
होर्मुज़ और कूटनीति पर मैक्रों का रुख
सैन्य और कूटनीतिक मुद्दों पर मैक्रों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बलपूर्वक खोलने के किसी भी प्रयास के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ऐसा अभियान लंबा, जोखिम भरा और वैश्विक जहाजरानी के लिए खतरनाक होगा। उनके मुताबिक, इस मुद्दे का समाधान केवल कूटनीति और ईरान के साथ संवाद से ही संभव है।
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नाटो पर उठाए सवालों पर चेतावनी
मैक्रों ने अमेरिका और नाटो के बदलते रुख पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि युद्ध और शांति जैसे गंभीर मुद्दों पर जिम्मेदारी जरूरी है। सहयोगियों से समर्थन न मिलने पर निराशा हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक रूप से नाटो की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना गठबंधन को कमजोर करता है।
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