तेहरान। ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुआ महंगाई और मुद्रा रियाल (Inflation and the currency Rial) की गिरावट के खिलाफ विरोध अब सरकार विरोधी आंदोलन में बदलता नजर आ रहा है। यहां तीसरे दिन भी विरोध-प्रदर्शन जारी रहे। बुधवार रात कई शहरों में लोग सड़कों पर उतरे और सरकार विरोधी तथा राजशाही समर्थक नारे लगाए। इन नारों में सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई पर निशाना था। अब इस आंदोलन में जेन-जेड भी कूद गया है।
जेन-जेड की एंट्री से आंदोलन को मिली नई धार
ईरान में जनता का विद्रोह 1989 की इस्लामिक क्रांति (Islamic revolution) की याद दिला रहा है। 46 साल पहले जिस तरह इस्लामिक कट्टरपंथियों ने देश की चुनी हुई सरकार का तख्ता पलटा था, उसी तरह अब आवाम ईरान की सत्ता को उखाड़ फेंकने पर आमादा नजर आ रही है। सड़कों पर ‘मुल्ला लीव ईरान’ जैसे नारे सरेआम लगाए जा रहे हैं।
पुराने विद्रोह की गूंज, फिर उबाल पर जनता
बता दें कि जनक्रांति को तीन साल पहले आयतुल्लाह अली खामेनेई ने ताकत के दम पर दबा दिया था, लेकिन वह असंतोष अब नए रूप में सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक उबाल मार रहा है। प्रदर्शनकारियों की ओर से ‘मुल्लाओं को ईरान छोड़ना होगा’ और ‘तानाशाही बर्दाश्त नहीं’ जैसे नारे लगाए जा रहे हैं।
विश्वविद्यालय और बाजार बने विरोध के केंद्र
मीडिया रिपोर्ट (Media Reports) के मुताबिक तेहरान और अन्य शहरों में विश्वविद्यालय और व्यावसायिक इलाके विरोध के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। हालात को देखते हुए सरकार ने कम से कम 17 प्रांतों में स्कूलों और सरकारी दफ्तरों को बंद करने की घोषणा की है। कई जगह प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है और विश्वविद्यालय परिसरों में छापेमारी भी की गई।
आंसू गैस और लाइव फायर की खबरें
रिपोर्टों के मुताबिक कुछ स्थानों पर आंसू गैस और लाइव फायर का इस्तेमाल किया गया। तेहरान में एक छात्र के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
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अमेरिकी बयान से बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव
वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ईरान पर हमले की धमकी ने भी असंतोष को और हवा दी है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ईरान के कई शहरों—मशहद, इस्फहान, जंजान, हमदान और मालार्ड—में प्रदर्शन फैल चुके हैं और आर्थिक कुप्रबंधन से त्रस्त ईरानियों के साहस की सराहना की है।
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