Global: बदलती वैश्विक व्यवस्था: अमेरिका-चीन के बीच भारत की नई कूटनीति

By Dhanarekha | Updated: February 3, 2026 • 2:55 PM

पुरानी व्यवस्था का अंत और नए साझेदारों की तलाश

वाशिंगटन: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और अन्य वैश्विक(Global) नेताओं का मानना है कि दुनिया की पुरानी आर्थिक व्यवस्था अब टूट रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की संरक्षणवादी नीतियों (टैरिफ) ने वैश्विक बाजार को अस्थिर कर दिया है। ऐसे में भारत अब सिर्फ अमेरिका या रूस पर निर्भर रहने के बजाय यूरोप, कनाडा, और ओमान(Oman) जैसे मध्यम ताकत वाले देशों के साथ हाथ मिला रहा है। भारत का लक्ष्य एक ऐसी बहुध्रुवीय व्यवस्था बनाना है जहाँ किसी एक देश का एकाधिकार न हो

यूरोपीय संघ (EU) के साथ ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’

भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ 18 साल से अटके पड़े मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को पूरा कर एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल की है। इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है क्योंकि यह 2 अरब लोगों के विशाल(Global) बाजार को आपस में जोड़ता है। अमेरिका की भूमिका वैश्विक व्यापार में कम होने के बाद, भारत और यूरोपीय संघ का यह समझौता दुनिया को एक नया आर्थिक ढांचा प्रदान करेगा। इसके अलावा, ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड(NewZealand) के साथ हुए समझौते भारत की ‘आत्मनिर्भर’ नीति और वैश्विक जुड़ाव के बीच एक नया संतुलन बना रहे हैं।

अन्य पढ़े: चीन की रॉकेट फोर्स में बड़ा स्कैम

नई दिल्ली बना वैश्विक राजनीति का केंद्र

पिछले कुछ महीनों में जर्मनी, जापान, यूएई और सऊदी अरब के नेताओं की भारत यात्रा यह दर्शाती है कि भारत अब वैश्विक फैसलों को प्रभावित करने वाली एक अनिवार्य शक्ति बन चुका है। भारत की अर्थव्यवस्था अब दुनिया(Global) की टॉप-5 में शामिल है, जो इसे निवेश के लिए सबसे आकर्षक गंतव्य बनाती है। आने वाले समय में ब्राजील और कनाडा के साथ होने वाले समझौते इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत अब अपनी विदेश नीति को केवल ‘सुरक्षा’ तक सीमित न रखकर ‘आर्थिक एकीकरण’ की ओर ले जा रहा है।

‘मध्यम शक्ति वाले देशों’ से दोस्ती बढ़ाना भारत के लिए क्यों जरूरी है?

जब अमेरिका और चीन जैसे महाशक्तियों के बीच व्यापार युद्ध छिड़ता है, तो विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है। भारत(Global) अगर केवल एक पक्ष के साथ रहेगा, तो उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कनाडा, जर्मनी और जापान जैसे देशों के साथ गठबंधन करके भारत एक ‘बफर जोन’ तैयार कर रहा है, ताकि वैश्विक अस्थिरता के समय उसकी सप्लाई चेन और व्यापार सुरक्षित रहे।

भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति में क्या बदलाव आ रहा है?

पहले ‘आत्मनिर्भरता’ का अर्थ अक्सर आयात कम करना और घरेलू उत्पादन पर ध्यान देना माना जाता था। लेकिन अब भारत अपनी नीति में नरमी ला रहा है और यह मान रहा है कि दुनिया के साथ आर्थिक रूप से जुड़कर ही देश को मजबूत बनाया जा सकता है। अब ध्यान ‘प्रोटेक्शनिज्म’ (संरक्षणवाद) से हटकर ‘ग्लोबल वैल्यू चेन’ का हिस्सा बनने पर है, जैसा कि ब्रिटेन और EU के साथ हुए समझौतों से स्पष्ट होता है।

अन्य पढ़े:

#Breaking News in Hindi #Geopolitics2026 #GlobalTradeShift #Google News in Hindi #Hindi News Paper #IndiaForeignPolicy #IndoEUTradeDeal #MiddlePowerAlliance #ModiDiplomacy