संसाधनों की जंग और रणनीतिक दांवपेच
नुउक: ग्लोबल वार्मिंग के कारण आर्कटिक की बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे नॉर्दर्न सी(Greenland) रूट (Northern Sea Route) जैसे नए व्यापारिक रास्ते खुल गए हैं। ये रास्ते एशिया और यूरोप के बीच की दूरी को काफी कम कर देते हैं, जिससे स्वेज नहर पर निर्भरता कम हो सकती है। इसके अलावा, बर्फ के नीचे दबे लगभग 15 लाख टन दुर्लभ खनिज (जैसे नियोडायमियम और यूरेनियम) अब पहुंच में आ रहे हैं। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों और आधुनिक तकनीक के लिए अनिवार्य हैं, जिसकी वजह से दुनिया की आठवें सबसे बड़े खनिज भंडार वाले इस क्षेत्र पर सबकी नजर है।
महाशक्तियों के बीच बढ़ता सैन्य और राजनीतिक तनाव
ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति(Geographical Location) इसे सुरक्षा के लिहाज से बेहद खास बनाती है। अमेरिका का यहाँ पहले से ही एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है, वहीं रूस ने भी पिछले दशक में आर्कटिक(Greenland) में कई पुराने सोवियत अड्डों को सक्रिय किया है। चीन खुद को ‘नियर आर्कटिक कंट्री’ बताकर यहाँ अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जताना और पुतिन का इस क्षेत्र में सैन्य पकड़ मजबूत करना यह दर्शाता है कि भविष्य में यह इलाका वैश्विक संघर्ष का केंद्र बन सकता है।
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भारत के लिए ग्रीनलैंड का महत्व: मानसून और विज्ञान
भारत के लिए ग्रीनलैंड(Greenland) का महत्व केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि पर्यावरणीय भी है। आर्कटिक में बर्फ पिघलने का सीधा असर भारतीय मानसून और हिमालय के ग्लेशियरों पर पड़ता है। भारत का ‘हिमाद्री’ रिसर्च स्टेशन यहाँ के बदलावों पर नजर रखता है ताकि मानसून के पैटर्न को बेहतर समझा जा सके। इसके अलावा, भविष्य में खुलने वाले नए समुद्री रास्ते और दुर्लभ खनिजों की उपलब्धता भारत की ऊर्जा सुरक्षा और ‘ग्रीन एनर्जी’ लक्ष्यों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
ग्रीनलैंड किस देश का हिस्सा है और यह चर्चा में क्यों है?
ग्रीनलैंड भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है लेकिन यह डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है। यह चर्चा में इसलिए है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण इसकी बर्फ पिघल रही है, जिससे यहाँ छिपे तेल, गैस और दुर्लभ खनिजों के विशाल भंडार तक पहुंच आसान हो गई है।
क्या अमेरिका वास्तव में ग्रीनलैंड को खरीदना चाहता है?
हाँ, अमेरिकी इतिहास में कई बार ग्रीनलैंड खरीदने की कोशिश हुई है। 1946 में राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने इसकी पेशकश की थी और हाल के वर्षों में डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। इसका मुख्य कारण ग्रीनलैंड की रणनीतिक लोकेशन और यहाँ मौजूद खनिज संसाधन हैं।
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