अब सोशल मीडिया प्रोफाइल की जाँच होगी अनिवार्य
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीज़ा नियमों में सख्ती के आदेश दिए हैं। अब H-1B वीज़ा आवेदकों के लिए अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल को सार्वजनिक करना आवश्यक होगा, ताकि अमेरिकी अधिकारी आवेदक की पोस्ट, लाइक्स और सामान्य ऑनलाइन गतिविधियों की समीक्षा कर सकें। यदि आवेदक(Applicant) की कोई भी सोशल मीडिया गतिविधि अमेरिकी हितों के खिलाफ पाई जाती है, तो उसे H-1B वीज़ा जारी नहीं किया जाएगा। यह नया नियम 15 दिसंबर से लागू होगा। H-1B के आश्रितों (H-4 वीज़ा धारकों) के लिए भी सोशल मीडिया प्रोफाइल को सार्वजनिक(Public) करना अनिवार्य होगा। यह पहली बार है जब H-1B वीज़ा के लिए इस तरह की जाँच ज़रूरी की गई है।
भारतीयों पर सबसे ज़्यादा असर और वीज़ा से जुड़े तथ्य
ट्रम्प प्रशासन के इस सख्त नियम का भारतीय पेशेवरों पर सबसे ज़्यादा असर पड़ेगा, क्योंकि हर साल जारी किए जाने वाले कुल H-1B वीज़ा में से लगभग 70% भारतीय प्रोफेशनल्स को दिए जाते हैं। H-1B वीज़ा उच्च-कुशल पेशेवरों, जैसे डॉक्टरों, इंजीनियरों और सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स के लिए जारी किया जाता है। पहले कार्यकाल में वीज़ा के प्रति ट्रम्प का रुख अस्थिर रहा था, लेकिन अब उन्होंने इसे अमेरिकी हितों के खिलाफ बताते हुए सख्त किया है। फीस पहले लगभग 9,000 डॉलर थी, लेकिन सितंबर 2025 में इसे बढ़ाकर लगभग ₹90 लाख कर दिया गया है। H-1B वीज़ा की कुल अवधि 6 साल होती है, जिसके बाद आवेदक ग्रीन कार्ड (स्थायी नागरिकता से पहले की स्टेज) के लिए आवेदन कर सकता है।
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टेक कंपनियों का वीज़ा स्पॉन्सरशिप और भारतीय टैलेंट पर असर
भारत हर साल लाखों इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के स्नातक तैयार करता है, जो अमेरिका की तकनीकी उद्योग में अहम भूमिका निभाते हैं। इंफोसिस, TCS, विप्रो, कॉग्निजेंट और HCL जैसी भारतीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अपने कर्मचारियों के लिए सबसे ज़्यादा वीज़ा स्पॉन्सर करती हैं। यह कहा जाता है कि भारत अमेरिका को सामान से ज़्यादा इंजीनियर और छात्र ‘एक्सपोर्ट’ करता है। फीस महंगी होने और नियमों में सख्ती के कारण अब संभावना है कि भारतीय टैलेंट यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मिडिल ईस्ट जैसे अन्य देशों की ओर रुख करेगा, जहाँ वीज़ा नीतियाँ अधिक उदार हैं। इसके अतिरिक्त, ट्रम्प ने $8.8 करोड़ की कीमत पर ‘ट्रम्प गोल्ड कार्ड’ जैसी नई वीज़ा सुविधाएँ भी शुरू की हैं, जो अनलिमिटेड रेसीडेंसी का अधिकार देती हैं।
H-1B वीज़ा के नए नियमों के तहत सोशल मीडिया प्रोफाइल की जाँच कब से अनिवार्य हो जाएगी?
इस वीज़ा के नए नियमों के तहत सोशल मीडिया प्रोफाइल की जाँच 15 दिसंबर से अनिवार्य हो जाएगी, जिसके तहत अमेरिकी अधिकारी आवेदक की सोशल मीडिया गतिविधियों की समीक्षा करेंगे।
H-1B वीज़ा के सख्त नियमों का सबसे ज़्यादा असर किस देश के पेशेवरों पर पड़ेगा, और क्यों?
इस वीज़ा के सख्त नियमों का सबसे ज़्यादा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा, क्योंकि हर साल जारी किए जाने वाले कुल H-1B वीज़ा में से लगभग 70% भारतीय प्रोफेशनल्स को ही दिए जाते हैं।
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