H-1B: H-1B वीजा प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

By Dhanarekha | Updated: March 13, 2026 • 4:52 PM

अब लॉटरी नहीं, सैलरी और अनुभव तय करेंगे अमेरिका का सफर

वाशिंगटन: अमेरिका ने H-1B वीजा चयन प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए रैंडम लॉटरी सिस्टम को समाप्त कर दिया है। 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने वाले नए फॉर्म I-129 के तहत, अब लाभार्थियों का चयन उनके वेतन स्तर (Salary Level) के आधार पर किया जाएगा। आवेदकों को चार वेतन स्तरों में विभाजित किया गया है, जहाँ उच्च वेतन और अनुभव वाले प्रोफेशनल्स को वरीयता दी जाएगी। यह नई प्रणाली यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि केवल अत्यधिक कुशल और उच्च-वेतन पाने वाले विशेषज्ञ ही अमेरिका के श्रम बाजार में प्रवेश कर सकें

वेतन स्तरों का गणित और भारतीय प्रोफेशनल्स पर प्रभाव

नए नियमों के अनुसार, लेवल-1 (एंट्री) से लेकर लेवल-4 (टीम लीडर/एक्सपर्ट) तक के लिए अवसरों का वितरण बदल दिया गया है। पहले सभी स्तरों को लॉटरी में समान अवसर मिलते थे, लेकिन अब लेवल-4 के उम्मीदवारों के पास चयन की संभावना 61.16% तक बढ़ जाएगी। चूँकि हर साल जारी होने वाले कुल H-1B वीजा में से 70% भारतीयों को मिलते हैं, इसलिए यह बदलाव भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और इंफोसिस, TCS जैसी बड़ी कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। इसके अलावा, वीजा फीस को बढ़ाकर 1 लाख डॉलर (लगभग 90 लाख रुपये) करना भारतीय टैलेंट के लिए अमेरिका को पहले से कहीं अधिक महंगा बनाता है।

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ट्रम्प प्रशासन की नीति और वैश्विक पलायन की संभावना

H-1B वीजा को लेकर ट्रम्प प्रशासन का रवैया हमेशा से अनिश्चित रहा है, जिसने पहले इसे अमेरिकी हितों के विपरीत बताया और अब ‘टैलेंट की जरूरत’ की बात कर रहा है। इसके साथ ही, ‘गोल्ड कार्ड’ जैसी प्रीमियम सुविधाओं की शुरुआत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका अब केवल चुनिंदा उच्च-नेटवर्थ वाले कुशल लोगों को ही अपने यहाँ स्थायी स्थान देना चाहता है। इन नई आर्थिक बाधाओं और महंगी फीस के चलते, भारतीय इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के अब यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मिडिल ईस्ट के देशों की ओर रुख करने की प्रबल संभावना है।

H-1B वीजा चयन की पुरानी और नई प्रक्रिया में क्या मुख्य अंतर है?

पुरानी प्रक्रिया ‘रैंडम लॉटरी’ आधारित थी, जहाँ सभी आवेदकों को समान अवसर मिलते थे। नई प्रक्रिया ‘सैलरी और अनुभव’ आधारित है, जहाँ आवेदकों को चार वेतन स्तरों में बांटा गया है; वेतन स्तर जितना ऊँचा होगा, चयन के उतने अधिक अवसर मिलेंगे।

H-1B वीजा फीस में कितनी बढ़ोतरी की गई है और इसका क्या असर होगा?

वीजा फीस को पहले के 9 हजार डॉलर (लगभग 8.30 लाख रुपये) से बढ़ाकर 1 लाख डॉलर (लगभग 90 लाख रुपये) कर दिया गया है। इससे अमेरिका में काम करने की लागत अत्यधिक बढ़ गई है, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय प्रोफेशनल्स अब अन्य देशों (कनाडा, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया) के विकल्प तलाश सकते हैं।

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