USA- ट्रंप का ईरान को संदेश : होर्मुज हर हाल में खुलेगा, कूटनीति के लिए पाकिस्तान में हलचल

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति (Donald Trump) ने बड़ा और सख्त बयान देकर भू-राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को लेकर ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब किसी समझौते का इंतजार नहीं करेगा। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत के लिए पाकिस्तान में हाई-लेवल कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का बड़ा ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने शनिवार (स्थानीय समय) जॉइंट बेस एंड्रयूज (JBA) पर मीडिया से बातचीत में कहा कि अब ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को खोलने का समय आ गया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान सैन्य रूप से कमजोर पड़ चुका है और अमेरिका इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को हर हाल में खुलवाएगा। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि इसके लिए किसी डील का इंतजार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह काम समझौते के साथ या बिना समझौते के भी किया जा सकता है।

पाकिस्तान पहुंची अमेरिकी टीम, ट्रंप को जल्द समाधान की उम्मीद

ट्रंप ने बताया कि उनकी एक मजबूत टीम (Islamabad) पहुंच चुकी है। इस टीम में उपराष्ट्रपति JD Vance, स्पेशल दूत Steve Witkoff और ट्रंप के दामाद Jared Kushner शामिल हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। उनके मुताबिक, ईरान की नौसेना, वायु सेना और एयर डिफेंस सिस्टम काफी हद तक निष्क्रिय हो चुके हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर बातचीत में देरी होती है, तो अमेरिका दूसरे विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।

ईरान ने रखीं बातचीत से पहले दो शर्तें

दूसरी ओर, ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच चुका है।ईरानी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, इस टीम में विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi, सुरक्षा परिषद के सचिव Ali Akbar Ahmadian और सेंट्रल बैंक के गवर्नर Abdolnaser Hemmati शामिल हैं।गालीबाफ ने साफ किया कि बातचीत शुरू होने से पहले दो शर्तें पूरी होनी चाहिए—पहली, लेबनान में युद्धविराम और दूसरी, ईरान के रोके गए फंड की वापसी।

सीजफायर पर अमेरिका-ईरान में मतभेद

अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम को लेकर अभी भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ईरान का मानना है कि इस समझौते में लेबनान में इजरायली हमलों का रुकना भी शामिल है। हालांकि, अमेरिका और इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि Hezbollah के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन इस सीजफायर का हिस्सा नहीं हैं। इस बीच, उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा है कि अगर ईरान ईमानदारी से बातचीत करता है, तो अमेरिका सहयोग के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी तरह की चालाकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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आज इस्लामाबाद में पहली अहम बैठक

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt के अनुसार, JD Vance के नेतृत्व में अमेरिकी टीम शनिवार (11 अप्रैल) को Islamabad में ईरानी प्रतिनिधिमंडल से पहली मुलाकात करेगी। यह बातचीत पिछले एक महीने से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं कि क्या ईरान अपनी शर्तों के बिना बातचीत में आगे बढ़ेगा या नहीं।

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Anuj Kumar

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