पुतिन दौरे से पहले मिलेगी मंजूरी
मॉस्को: भारत(India) और रूस के बीच रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट (RELOS) को आज रूसी संसद के निचले सदन स्टेट डूमा में मंजूरी देने के लिए वोटिंग होगी। यह समझौता इसी साल फरवरी में दोनों देशों के बीच साइन हुआ था, लेकिन औपचारिक मंजूरी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन(Vladimir Putin) के भारत दौरे से पहले मिल रही है। RELOS को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी में सबसे अहम रक्षा समझौतों में से एक माना जा रहा है। इसका उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच तालमेल को आसान बनाना और सैन्य अभ्यास, आपदा राहत व अन्य संयुक्त अभियानों में सहयोग को बढ़ावा देना है।
एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल कर सकेंगी सेनाएँ
RELOS एक डिफेंस लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज समझौता है। इस समझौते के तहत, भारत और रूस की सेनाएँ एक-दूसरे के सैन्य बेस, बंदरगाह, एयरफील्ड और सप्लाई पॉइंट का इस्तेमाल कर सकेंगी। यह सुविधा केवल ईंधन भरने, मरम्मत, स्टॉक रिफिल, मेडिकल सपोर्ट, ट्रांजिट और मूवमेंट जैसे गैर-लड़ाकू कार्यों के लिए होगी। भारत(India) ने पहले ही अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे कई प्रमुख देशों के साथ ऐसे समझौते किए हैं, और अब रूस भी इस सूची में शामिल हो रहा है। रूस की व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत, पुतिन के दौरे और वार्षिक बैठक से पहले संसद की मंजूरी मिलना आवश्यक है।
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पुतिन के दौरे पर डिफेंस समझौतों पर रहेगा फोकस
पुतिन इस हफ्ते गुरुवार को भारत दौरे पर आने वाले हैं, जहाँ डिफेंस समझौते सबसे ज्यादा फोकस में रहेंगे। रूस पहले ही भारत को अपना सबसे एडवांस लड़ाकू विमान SU-57 स्टेल्थ फाइटर जेट देने की पेशकश कर चुका है। इसके अलावा, बैठक में S-500 मिसाइल पर भविष्य में सहयोग, ब्रह्मोस मिसाइल का अगला वर्जन, और नौसेनाओं के लिए मिलकर वॉरशिप बनाने जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर बातचीत होने की उम्मीद है। भारत(India) रूस से कुछ और S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने पर भी बातचीत कर सकता है, क्योंकि यह सिस्टम पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान काफी प्रभावी रहा था।
RELOS समझौता किस तरह का सहयोग सुनिश्चित करेगा और सेनाएँ एक-दूसरे के ठिकानों का इस्तेमाल किन कामों के लिए कर सकेंगी?
RELOS एक लॉजिस्टिक्स सपोर्ट समझौता है, जो दोनों सेनाओं के बीच सैन्य अभ्यास, आपदा राहत और संयुक्त अभियानों में तालमेल को(India) आसान बनाएगा। सेनाएँ एक-दूसरे के सैन्य बेस, बंदरगाहों और एयरफील्ड का इस्तेमाल सिर्फ ईंधन भरने, मरम्मत, स्टॉक रिफिल, मेडिकल सपोर्ट, ट्रांजिट और मूवमेंट जैसे कामों के लिए कर सकेंगी।
राष्ट्रपति पुतिन के आगामी भारत दौरे के दौरान रक्षा सहयोग के क्षेत्र में कौन-से महत्वपूर्ण समझौते या बातचीत होने की उम्मीद है?
पुतिन के दौरे में SU-57 स्टेल्थ फाइटर जेट देने की पेशकश पर चर्चा, भविष्य में S-500 मिसाइल पर सहयोग, ब्रह्मोस मिसाइल के अगले वर्जन पर काम, दोनों देशों(India) की नौसेनाओं के लिए मिलकर वॉरशिप बनाने की योजनाएँ, और कुछ अतिरिक्त S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने पर बातचीत होने की उम्मीद है।
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