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Bangladesh- बीएनपी की वापसी से भारत सतर्क, सीमा सुरक्षा और कूटनीति बनी बड़ी चिंता

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: February 15, 2026 • 11:25 AM
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ढाका । बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में पिछले दो दशकों से चले आ रहे गतिरोध को समाप्त करते हुए तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने अपने सहयोगियों के साथ आम चुनावों में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। घोषित 297 सीटों में से 212 पर शानदार कब्जा जमाकर बीएनपी ने न केवल संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है, बल्कि 20 साल के लंबे अंतराल के बाद सत्ता में वापसी भी की है। हालांकि, जहां एक ओर बांग्लादेश में जश्न का माहौल है, वहीं दूसरी ओर इस चुनावी नतीजे ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों और नीति निर्धारकों की चिंता बढ़ा दी है।

जमात की बढ़ती ताकत ने बढ़ाई भारत की चिंता

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता बीएनपी की जीत से ज्यादा उसके सहयोगी दल जमात-ए-इस्लामी और 11 अन्य सहयोगियों द्वारा 77 सीटों पर दर्ज की गई सफलता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जमात का बढ़ता राजनीतिक प्रभाव सीमा पार समीकरणों को बदल सकता है। खास बात यह है कि जमात की जीत वाली कई सीटें पश्चिम बंगाल और असम से सटे बांग्लादेशी जिलों में हैं, जो भारत के लिए रणनीतिक रूप से संवेदनशील माने जाते हैं।

सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा अलर्ट

भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, जमात का प्रभाव पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जिलों के साथ-साथ असम के सिलचर से सटे क्षेत्रों तक फैल चुका है। ऐसे में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के लिए बिना कंटीली तार वाले सीमा क्षेत्रों में घुसपैठ, मानव तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। राजनीतिक बदलाव के बाद भारत ने सीमावर्ती राज्यों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन

सुरक्षा के साथ-साथ बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा भी भारत की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि जमात ने भले ही सार्वजनिक रूप से नरम रुख दिखाया हो, लेकिन अतीत के अनुभवों को देखते हुए भारत को सतर्क रुख अपनाना होगा। दिल्ली के लिए ढाका के साथ नए सिरे से राजनयिक संतुलन बनाना आसान नहीं होगा।

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आतंकवाद का खतरा भी बरकरार

खुफिया एजेंसियों ने चेताया है कि जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) जैसे प्रतिबंधित संगठनों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखना जरूरी है। पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल और कोलकाता में जेएमबी नेटवर्क से जुड़े कई मामलों का खुलासा हो चुका है। ऐसे में बांग्लादेश की नई सत्ता व्यवस्था भारत के लिए सुरक्षा और सहयोग के बीच एक नाजुक संतुलन की परीक्षा साबित हो सकती है।

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