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INDIAS VOICE: ऑक्सफोर्ड में गूंजी भारत की आवाज

Author Icon By Dhanarekha
Updated: December 24, 2025 • 3:40 PM
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‘बेशर्म देश को शर्मिंदा नहीं कर सकते’

लंदन: ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसाइटी में ‘भारत की पाकिस्तान नीति'(INDIAS VOICE) पर हुई बहस में मुंबई(Mumbai) के छात्र विरांश भानुशाली ने पाकिस्तानी छात्र मूसा हर्राज(moses harraj) को कड़ा जवाब दिया। विरांश ने 26/11 के मुंबई हमलों का जिक्र करते हुए इसे भारत के लिए एक ‘कड़वा सबक’ बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की सख्त विदेश नीति कोई चुनावी हथकंडा (लोकलुभावनवाद) नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए उठाया गया अनिवार्य कदम है। विरांश ने कहा कि जिस देश में शर्म का अभाव हो, उसे कूटनीतिक रूप से शर्मिंदा करना असंभव है, इसलिए सुरक्षा को प्राथमिकता देना मजबूरी है

दिखावा नहीं, यह नागरिकों की सुरक्षा है

बहस के दौरान जब पाकिस्तानी छात्र ने भारत पर ‘डर की राजनीति’ करने का आरोप लगाया, तो विरांश ने एक प्रभावशाली उदाहरण दिया। उन्होंने पूछा कि “यदि घर के पास चोरियां हो रही हों, तो क्या दरवाजे पर ताला लगाना दिखावा है या सुरक्षा?” उन्होंने तर्क दिया कि भारत ने 26/11 के बाद भी संयम दिखाया और दुनिया को सबूत दिए, लेकिन जब पठानकोट, उरी और पुलवामा(INDIAS VOICE) जैसे हमले लगातार जारी रहे, तो भारत को अपनी नीति बदलनी पड़ी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को ‘धर्म पूछकर हत्या करने’ के माध्यम से थोपा गया है, जिसे भारत अब और बर्दाश्त नहीं करेगा।

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शांति की इच्छा बनाम आतंकवाद की नीति

विरांश भानुशाली ने बहस के अंत में भारत का रुख साफ करते हुए कहा कि भारत युद्ध नहीं, बल्कि शांति चाहता है। भारत व्यापार(INDIAS VOICE) और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग का इच्छुक है, लेकिन यह तब तक संभव नहीं है जब तक आतंकवाद को एक सरकारी नीति (State Policy) की तरह इस्तेमाल किया जाता रहेगा। उन्होंने पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि असली ‘तमाशा’ वहाँ होता है, जहाँ जनता को रोटी देने के बजाय भारत के खिलाफ नफरत दिखाई जाती है। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि अपने नागरिकों की जान बचाना राजनीति नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

विरांश भानुशाली ने भारत की सुरक्षा नीति को ‘लोकप्रिय चुनावी रणनीति’ बताने वाले आरोप का क्या जवाब दिया?

उन्होंने कैलेंडर की तारीखों (1993 धमाके, 26/11 हमले, उरी, पुलवामा) का हवाला देते हुए पूछा कि क्या ये हमले चुनावों के समय हुए थे? उन्होंने स्पष्ट किया कि ये हमले भारत पर थोपे गए थे और घर की सुरक्षा के लिए दरवाजा बंद करना दिखावा नहीं, बल्कि आवश्यकता है।

विरांश के अनुसार भारत और पाकिस्तान की राजनीति में क्या बड़ा अंतर है?

विरांश ने कहा कि भारत(INDIAS VOICE) अपनी सुरक्षा के प्रति गंभीर है, जबकि पाकिस्तान में जब भारत कोई कार्रवाई करता है, तो उसे जश्न और तमाशा बनाया जाता है। उन्होंने तंज किया कि जब पाकिस्तान अपने लोगों को रोटी नहीं दे पाता, तब वह उन्हें इस तरह के तमाशे दिखाता है।

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