तेहरान । ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच हाल ही में हुए 10-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव पर अब संकट गहराता नजर आ रहा है। ईरान ने अमेरिका पर तीन अहम शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया है, जिससे दोनों देशों के बीच भरोसे पर सवाल खड़े हो गए हैं।
संसद स्पीकर का सख्त रुख
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ (Muhammad Baqir Galib) ने कहा कि इन उल्लंघनों के बाद अमेरिका के साथ बातचीत करना अब तार्किक नहीं रह गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे हालात में वार्ता की विश्वसनीयता कमजोर पड़ती है।
उल्लंघन के तीन प्रमुख आरोप
गालिबफ ने तीन बिंदुओं का हवाला देते हुए अमेरिका पर आरोप लगाए।
पहला—लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल के हमले, जिसे उन्होंने युद्धविराम का उल्लंघन बताया।
दूसरा—ईरानी हवाई क्षेत्र में ड्रोन का प्रवेश, जिसे फार्स प्रांत के लार क्षेत्र में मार गिराया गया।
तीसरा—ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार की अनदेखी।
शांति प्रयासों पर पड़ा असर
ईरान का कहना है कि ये घटनाएं शांति प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही हुईं, जिससे संघर्षविराम की संभावनाएं कमजोर हो गई हैं और दोनों देशों के बीच अविश्वास बढ़ा है।
इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता
हालांकि, अमेरिका ने शनिवार से इस्लामाबाद (Islamabad) में वार्ता आयोजित करने की घोषणा की है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे, जबकि ईरान की ओर से गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल होंगे।
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क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि इन आरोप-प्रत्यारोपों से मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। आने वाली वार्ता की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष आपसी मतभेदों को सुलझाने में कितना लचीलापन दिखाते हैं।
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