Iran Protest : ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। ईरानी रियाल की कीमत में लगातार गिरावट के कारण महंगाई चरम पर पहुंच गई है। पिछले चार दिनों से देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। हालात को काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों ने कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन के लिए चुनौती बन सकता है।
विरोध क्यों हो रहे हैं?
रविवार से शुरू हुए इन प्रदर्शनों की मुख्य वजह रियाल का रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचना है। बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा की चीज़ों की कीमतों ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सरकार का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन स्वीकार्य हैं, लेकिन हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्या खामेनेई की सत्ता खतरे में है?
इन विरोध प्रदर्शनों के चलते खामेनेई की सत्ता पर खतरे की (Iran Protest) अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड, सुरक्षा एजेंसियों और धार्मिक संस्थानों का समर्थन खामेनेई के साथ है, जिससे उनके तत्काल सत्ता छोड़ने की संभावना कम नजर आती है।
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ट्रंप की भूमिका पर सवाल
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण हैं। डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने ईरानी अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया। तेल निर्यात पर रोक और ईरानी बैंकों को वैश्विक वित्तीय प्रणाली से अलग करने के फैसलों ने हालात और बिगाड़ दिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन्हीं नीतियों का असर अब सड़कों पर दिख रहा है। कुछ हलकों में यह भी दावा किया जा रहा है कि खामेनेई को सत्ता से हटाने और अमेरिका समर्थक नेतृत्व लाने की साज़िश रची जा रही है।
युद्ध और उत्तराधिकार की चिंता
2025 में ईरान–इज़रायल युद्ध ने हालात को और खराब कर दिया। इज़रायल के हमलों से ईरान की रक्षा और परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुंचा। साथ ही, 86 वर्षीय खामेनेई की बिगड़ती सेहत और उनके बाद सत्ता किसे मिलेगी, इस पर ईरान के भीतर अंदरूनी खींचतान शुरू हो चुकी है।
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