Iran War- ईरान की तेल व्यवस्था पर बड़ा वार, रिफाइनरियों पर हमले से दहला तेहरान

By Anuj Kumar | Updated: March 8, 2026 • 11:42 AM

तेहरान। मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष ने अब तक का सबसे भयावह रूप अख्तियार कर लिया है। शनिवार देर रात अमेरिका और इजरायली वायुसेना ने ईरान की राजधानी तेहरान (Capital Tehran) पर अब तक के सबसे भीषण हवाई हमले किए। इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले तेल डिपो और ऊर्जा बुनियादी ढांचों को ध्वस्त करना था। हमलों के बाद पूरी राजधानी धमाकों की गूंज से दहल उठी और आकाश में दूर-दूर तक आग की लपटें व धुएं का गुबार देखा गया।

शहरान तेल डिपो और कई ठिकाने बने निशाना

ईरानी सूत्रों के अनुसार, दक्षिण तेहरान और उत्तर-पश्चिमी इलाके में स्थित शहरान तेल डिपो पर कई मिसाइलें (Missile) दागी गईं। हमले इतने सटीक और विनाशकारी थे कि इनकी आवाज पड़ोसी शहर करज तक सुनी गई। सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों और वीडियो में तेहरान के आसमान में आग के विशाल गोले साफ देखे जा सकते हैं।

इजरायल ने ली हमलों की जिम्मेदारी

इजरायली सेना ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उन्होंने उन विशिष्ट ईंधन भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया है, जिनका उपयोग ईरानी सशस्त्र बल अपनी सैन्य गतिविधियों के लिए कर रहे थे। इन हमलों की चपेट में तेहरान के पास स्थित शहर-ए-रे जिले की मुख्य रिफाइनरी और अल्बोर्ज प्रांत के कई महत्वपूर्ण ऑयल डिपो भी आए हैं।

ऊर्जा ढांचे पर हमला, रणनीतिक दबाव की कोशिश

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा ठिकानों पर यह सीधा प्रहार ईरान की अर्थव्यवस्था और उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता को पंगु बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पिछले एक सप्ताह से जारी इस जंग में यह पहली बार है जब ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को इतने बड़े स्तर पर निशाना बनाया गया है।

ट्रंप की चेतावनी के बाद बढ़ी सैन्य कार्रवाई

यह कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की उस चेतावनी के ठीक बाद हुई है, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि आज ईरान पर बहुत बुरा असर पड़ेगा और कई अन्य ईरानी अधिकारी भी उनके निशाने पर होंगे।

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युद्ध में अब तक भारी जान-माल का नुकसान

युद्ध के आंकड़ों पर गौर करें तो एक सप्ताह पहले शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक भारी जान-माल का नुकसान हो चुका है। रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक ईरान में कम से कम 1,230 लोग, लेबनान में 290 से अधिक और इजराइल में लगभग एक दर्जन लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

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