JD Vance controversy : अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के आव्रजन पर दिए गए बयान से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वेंस ने सामूहिक प्रवास को “अमेरिकन ड्रीम की चोरी” बताया, जिसके बाद उनकी आलोचना शुरू हो गई। कई लोगों ने इस बयान को पाखंडी और नस्लभेदी करार दिया, खासकर यह याद दिलाते हुए कि उनकी पत्नी उषा भारतीय मूल की हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वेंस ने लिखा कि बड़े पैमाने पर प्रवास अमेरिकी श्रमिकों से अवसर छीन रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके विचारों के विरोध में आने वाले अध्ययन उन्हीं लोगों द्वारा वित्तपोषित हैं, जो “पुरानी व्यवस्था” से लाभ उठा रहे हैं।
इस पर लेखक और राजनीतिक विश्लेषक वजाहत अली ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “इस तर्क के मुताबिक तो आपको अपनी पत्नी उषा, उनके परिवार और अपने बच्चों को भी भारत भेजना होगा।”
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धर्म और संस्कृति पर बयान से भी विवाद
आव्रजन विवाद के बीच वेंस के सांस्कृतिक और धार्मिक टिप्पणियां भी सुर्खियों में रहीं। (JD Vance controversy) न्यूयॉर्क पोस्ट के एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि लोगों का अपने जैसे नस्ल, भाषा या रंग के पड़ोसियों को पसंद करना “स्वाभाविक और स्वीकार्य” है। इन बयानों की नागरिक अधिकार संगठनों ने कड़ी आलोचना की।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी पत्नी उषा कभी ईसाई धर्म अपनाएंगी। इस टिप्पणी को कई लोगों ने असंवेदनशील माना। बाद में वेंस ने सफाई देते हुए कहा कि उषा धर्म परिवर्तन की इच्छुक नहीं हैं और वह उनके विश्वास का सम्मान करते हैं।
कड़े आव्रजन कदमों के बीच तनाव
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन ने आव्रजन नीति और सख्त कर दी है। 3 दिसंबर को USCIS ने 19 “उच्च जोखिम” वाले देशों से सभी आव्रजन आवेदनों पर तत्काल रोक लगाने की घोषणा की, जिससे लाखों लंबित मामलों पर असर पड़ा है।
विश्लेषकों का मानना है कि वेंस की भाषा राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, लेकिन इससे अमेरिका की विविधता और सामाजिक एकता को नुकसान पहुंच सकता है। उनका कहना है कि आव्रजन को डर और विभाजन के बजाय व्यावहारिक और मानवीय तरीके से संभालने की जरूरत है।
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