तेहरान: खार्ग(Kharg) आइलैंड फारस की खाड़ी में स्थित ईरान का सबसे महत्वपूर्ण(Important) तेल निर्यात केंद्र है, जहाँ से देश का लगभग 80% से 90% कच्चा तेल दुनिया भर में भेजा जाता है। अपनी उन्नत पाइपलाइन प्रणाली और विशाल स्टोरेज क्षमता के कारण, यह आइलैंड ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य वित्तपोषण की रीढ़ है। यह स्थान न केवल ईरान के लिए, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री तेल मार्गों में से एक, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बेहद करीब स्थित है।
सैन्य विकल्प और विश्वयुद्ध का जोखिम
हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ईरान की युद्ध क्षमता को कमजोर करने के लिए खार्ग आइलैंड पर सैन्य कार्रवाई या कब्जे के विकल्पों(Options) पर विचार कर रहा है। हडसन इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों का मानना है कि इस आइलैंड(Kharg) पर हमला करना एक गंभीर ‘रेड लाइन’ पार करने जैसा होगा। यदि ऐसा होता है, तो ईरान द्वारा बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की आशंका है, जो सीधे तौर पर तीसरे विश्व युद्ध जैसी वैश्विक स्थिति को जन्म दे सकती है और वैश्विक तेल बाजारों में भारी अस्थिरता पैदा कर सकती है।
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‘डार्क फ्लीट’ और तेल निर्यात का खेल
ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और निगरानी से बचने के लिए अक्सर ‘डार्क फ्लीट’ का सहारा लेता है, जहाँ तेल टैंकर अपनी ट्रैकिंग मशीनों(Kharg) को बंद कर अपनी लोकेशन छुपाते हैं। युद्ध के तनाव के बावजूद, ईरान यहाँ से लगातार तेल निर्यात कर रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि खार्ग आइलैंड पर हमला होता है या सप्लाई बाधित होती है, तो वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें प्रति बैरल 10 डॉलर तक बढ़ सकती हैं, जिससे न केवल ईरान की आय पर असर पड़ेगा बल्कि दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
खार्ग आइलैंड को ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
खार्ग आइलैंड ईरान के कुल कच्चे तेल निर्यात का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। यहाँ बड़े तेल टर्मिनल, स्टोरेज टैंक और पाइपलाइनें मौजूद हैं, जो ईरान की आय का प्राथमिक स्रोत हैं। इसी तेल की बिक्री से प्राप्त धन का उपयोग ईरान अपनी सरकार और सैन्य ताकत को मजबूत करने के लिए करता है।
यदि खार्ग आइलैंड पर हमला होता है, तो वैश्विक बाजार पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
खार्ग आइलैंड ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के समीप है, जहाँ से दुनिया का 20% तेल गुजरता है। यदि यहाँ हमला होता है, तो आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं (अनुमानित 10 डॉलर प्रति बैरल तक की बढ़ोतरी), जिससे पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।
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