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NATO: NATO के अस्तित्व पर मंडराता संकट और ट्रम्प की सैन्य धमकी

Author Icon By Dhanarekha
Updated: January 6, 2026 • 4:15 PM
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नाटो की नींव पर प्रहार: डेनमार्क की कड़ी चेतावनी

कोपेनहेगन: डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह का कब्जा या सैन्य हस्तक्षेप NATO (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) के लिए ‘डेथ वारंट’ साबित होगा। चूंकि डेनमार्क और अमेरिका दोनों नाटो के संस्थापक सदस्य हैं, इसलिए एक सदस्य द्वारा दूसरे की संप्रभुता का उल्लंघन नाटो के अनुच्छेद 5 (Article 5) की मूल भावना को खत्म कर देगा। प्रधानमंत्री के अनुसार, यदि दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति अपने ही सहयोगियों की सीमाओं का सम्मान नहीं करेगी, तो सुरक्षा गठबंधन की पूरी व्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी

ट्रम्प की ‘आर्कटिक’ महत्वाकांक्षा और वेनेजुएला का संदर्भ

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वेनेजुएला में हालिया अमेरिकी कमांडो कार्रवाई के बाद ग्रीनलैंड को लेकर अपनी रणनीति फिर से चर्चा में ला दी है। ट्रम्प ने संकेत दिया है कि वह ग्रीनलैंड पर “20 दिनों के भीतर” चर्चा करेंगे, जिसे ग्रीनलैंड(Green Land) के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने अपमानजनक बताया है। अमेरिका(NATO) की नजर ग्रीनलैंड के विशाल प्राकृतिक संसाधनों, दुर्लभ खनिजों और आर्कटिक क्षेत्र में रूस-चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने पर है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिकी झंडे में रंगा हुआ दिखाना इस तनाव को और हवा दे रहा है।

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रणनीतिक और आर्थिक संसाधनों की होड़

अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड मात्र एक द्वीप नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की “फ्रंट लाइन” है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण बर्फ पिघलने से यहाँ नए समुद्री व्यापारिक मार्ग खुल रहे हैं, जिस पर अमेरिका अपना वर्चस्व चाहता है। इसके अलावा, यहाँ मौजूद ‘रेयर अर्थ एलिमेंट्स’ पर चीन के एकाधिकार को तोड़ने के लिए भी अमेरिका(NATO) इस क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण की इच्छा रखता है। थुले एयर बेस के माध्यम से अमेरिका पहले से ही वहाँ मौजूद है, लेकिन अब वह इसे एक स्वायत्त क्षेत्र के बजाय अमेरिकी क्षेत्र के रूप में देखने की कोशिश कर रहा है।

यदि अमेरिका ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो नाटो क्यों खत्म हो जाएगा?

नाटो की पूरी नींव इस सिद्धांत पर टिकी है कि एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा। डेनमार्क एक संप्रभु राष्ट्र और नाटो(NATO) सदस्य है। यदि गठबंधन का नेतृत्व करने वाला देश (अमेरिका) ही अपने सहयोगी देश (डेनमार्क/ग्रीनलैंड) पर हमला करता है, तो सामूहिक सुरक्षा का विश्वास खत्म हो जाएगा। इससे नाटो के अन्य सदस्य देश खुद को असुरक्षित महसूस करेंगे और गठबंधन पूरी तरह से टूट जाएगा।

अमेरिका ग्रीनलैंड को खरीदने या कब्जा करने में इतनी दिलचस्पी क्यों दिखा रहा है?

इसके तीन मुख्य कारण हैं: पहला, रणनीतिक स्थिति, जो रूस और चीन की मिसाइल गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सर्वोत्तम है। दूसरा, प्राकृतिक संसाधन, क्योंकि यहाँ दुर्लभ खनिज और तेल-गैस के विशाल भंडार हैं। तीसरा, आर्कटिक समुद्री मार्ग, जो भविष्य में व्यापार के लिए छोटे और नए रास्ते प्रदान करेंगे। अमेरिका चाहता है कि इन संसाधनों और रास्तों पर चीन या रूस का प्रभाव न रहे।

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