Nepal Election: नेपाल चुनाव: बालेन शाह का उदय और केपी ओली की पिछड़ती राह

By Dhanarekha | Updated: March 6, 2026 • 3:44 PM

नई राजनीति की लहर और RSP का दबदबा

काठमांडू: नेपाल के आम चुनाव में इस बार बड़ा उलटफेर देखने(Nepal Election) को मिल रहा है। काठमांडू के पूर्व मेयर और रैपर बालेन शाह की ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ (RSP) शुरुआती रुझानों में एकतरफा बढ़त बनाए हुए है। मात्र 4 साल पुरानी यह पार्टी 126 में से 95 सीटों पर आगे चल रही है, जो नेपाल की पारंपरिक राजनीति के अंत का संकेत दे रही है। मतदाताओं का झुकाव पुराने चेहरों के बजाय नए और स्वतंत्र उम्मीदवारों की ओर साफ दिखाई दे रहा है

दिग्गज नेताओं की साख दांव पर

भारत विरोधी रुख के लिए जाने जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपने ही गढ़ झापा-5 में पिछड़ते नजर आ रहे हैं। बालेन शाह ने ओली(Nepal Election) पर करीब चार गुना बढ़त बना ली है, जो ओली की राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इसके अलावा, नेपाली कांग्रेस(Congress) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार गगन थापा भी अपने क्षेत्र सरलाही-4 में पिछड़ रहे हैं। बड़े नेताओं की यह स्थिति दर्शाती है कि जनता अब स्थापित राजनीतिक दलों के प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं है।

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मतदान प्रतिशत और मतगणना की प्रक्रिया

पिछले साल सितंबर में हुई हिंसा के बावजूद, गुरुवार को हुए मतदान में 60% से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जो लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था को दर्शाता है। चुनाव आयोग(Nepal Election) के अनुसार, वोटों की पूरी गिनती में 3 से 4 दिन का समय लग सकता है और 9 मार्च तक अंतिम परिणाम आने की उम्मीद है। यदि मौजूदा रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो नेपाल में एक पूर्णतः नई विचारधारा वाली सरकार का गठन हो सकता है, जिसका असर दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा।

नेपाल चुनाव में बालेन शाह की पार्टी (RSP) की सफलता का मुख्य कारण क्या माना जा रहा है?

बालेन शाह की पार्टी की सफलता का मुख्य कारण जनता का पारंपरिक राजनीतिक दलों (जैसे नेपाली कांग्रेस और CPN-UML) से मोहभंग होना और एक युवा, स्वतंत्र और काम करने वाली नई राजनीति के प्रति विश्वास है, जिसे बालेन शाह ने मेयर के रूप में अपने कार्यों से साबित किया था।

केपी शर्मा ओली की हार के भारत-नेपाल संबंधों पर क्या संभावित प्रभाव पड़ सकते हैं?

केपी शर्मा ओली को अक्सर चीन के करीब और भारत विरोधी रुख वाला नेता माना जाता रहा है। उनकी हार और नई पार्टी के उदय से भारत-नेपाल संबंधों में एक नया संतुलन बन सकता है, जहाँ संबंधों को विचारधारा के बजाय व्यावहारिक और विकास केंद्रित आधार पर आगे बढ़ाया जा सके।

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