Oil Crisis: तेल संकट से बेअसर चीन

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आत्मनिर्भरता की रणनीति और ऊर्जा के नए विकल्पों ने दी सुरक्षा

बीजिंग: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण जहां दुनिया के कई देश गहरे ऊर्जा संकट(Oil Crisis) का सामना कर रहे हैं, वहीं चीन पर इसका प्रभाव काफी कम देखा जा रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक होने के बावजूद चीन ने खुद को सुरक्षित कर लिया है। इसकी मुख्य वजह चीन की दूरगामी सोच(Long-term thinking) है, जिसके तहत उसने 20 साल पहले (2004) से ही इमरजेंसी तेल भंडार बनाना शुरू कर दिया था। इसके अलावा, चीन ने अपनी निर्भरता पेट्रोल-डीजल से हटाकर बिजली और कोयले आधारित तकनीकों पर स्थानांतरित कर दी है, जिससे वैश्विक सप्लाई शॉक का उस पर असर नहीं पड़ रहा

इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार

चीन ने अपनी ऊर्जा नीति को रणनीतिक रूप से बदलते हुए सौर, पवन और जल ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों में भारी निवेश किया है। आज चीन दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाजार बन चुका है, जिसके कारण वहां परिवहन के लिए तेल की मांग में लगातार गिरावट आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन में कच्चे तेल की मांग अपने चरम (Peak) पर पहुंच चुकी है और अब यह धीरे-धीरे कम होगी। इस बदलाव ने चीन को अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से काफी हद तक सुरक्षित कर दिया है।

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कोयले से केमिकल निर्माण और औद्योगिक मजबूती

चीन ने विदेशी निर्भरता कम करने के लिए एक विशेष तकनीक विकसित की है, जिससे वह कोयले का उपयोग करके जरूरी केमिकल जैसे मेथेनॉल और सिंथेटिक अमोनिया बना रहा है। प्लास्टिक, रबर और खाद (यूरिया) बनाने के लिए अब उसे बाहरी तेल या गैस की आवश्यकता नहीं है। उदाहरण के तौर पर, जहां वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतें 40% तक बढ़ गई हैं, वहीं चीन में कोयले से बनने वाले यूरिया की लागत वैश्विक दर से आधी है। हालांकि चीन अपनी 75% तेल जरूरतों के लिए अब भी आयात पर निर्भर है, लेकिन उसकी औद्योगिक मजबूती ने उसे एक सुरक्षा कवच प्रदान किया है।

चीन ने तेल संकट से बचने के लिए आपातकालीन तेल भंडार बनाना कब शुरू किया था?

समुद्री रास्तों (जैसे मलक्का स्ट्रेट) पर चीन ने अपनी निर्भरता और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए साल 2004 में इमरजेंसी तेल भंडार बनाना शुरू किया था।

चीन केमिकल सेक्टर में दूसरे देशों पर निर्भर क्यों नहीं है?

चीन ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली है जिससे वह कोयले की मदद से मेथेनॉल और सिंथेटिक अमोनिया जैसे जरूरी केमिकल बना सकता है, जिससे उसे प्लास्टिक और खाद निर्माण के लिए बाहरी तेल या गैस की जरूरत नहीं पड़ती।

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Dhanarekha

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