इमरान की रिहाई के लिए ‘यूथ फोर्स’ का गठन और अटक ब्रिज पर कब्जा
इस्लामाबाद: इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान(Pakistan) तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के हजारों उग्र समर्थकों ने खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब प्रांत को जोड़ने वाले सामरिक रूप से महत्वपूर्ण अटक ब्रिज पर कब्जा कर लिया है। समर्थकों ने इस मुख्य राजमार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया है, जिससे खैबर पख्तूनख्वा का संपर्क बाकी पाकिस्तान से कट गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनके नेता को रिहा नहीं किया जाता, वे पीछे नहीं हटेंगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने इस्लामाबाद और रावलपिंडी से करीब 5 हजार अतिरिक्त सैनिकों को मोर्चे पर रवाना कर दिया है।
मुख्यमंत्री का बड़ा एलान: ‘इमरान रिलीज फोर्स’ का गठन
खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी ने इमरान खान की आजादी के लिए युवाओं की एक विशेष ‘इमरान रिलीज फोर्स’ बनाने का एलान किया है। उन्होंने घोषणा की कि इस फोर्स के सदस्यों को बाकायदा ‘मेंबरशिप कार्ड’ जारी किए जाएंगे और वे शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी तरीके से देशव्यापी(Pakistan) आंदोलन करेंगे। मुख्यमंत्री के इस कदम ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान को चुनौती दी है। वहीं, इमरान के समर्थन में विपक्षी गठबंधन ‘तहरीक-ए-तहाफुज-ए-आइन-पाकिस्तान’ (TTAP) ने भी इस्लामाबाद कूच करने की चेतावनी दी है।
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30 महीने की कैद और ट्रम्प फैक्टर का इंतजार
इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं और वर्तमान में तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में 14 साल की सजा काट रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेल में उनकी सेहत (खासकर आंखों की रोशनी) को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। पाकिस्तान(Pakistan) की राजनीति में यह चर्चा जोरों पर है कि भले ही इमरान की जेल पर आर्मी चीफ मुनीर का पहरा हो, लेकिन उनकी रिहाई की ‘चाबी’ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के रुख पर निर्भर कर सकती है। हालांकि, अभी तक अमेरिका की ओर से इस मुद्दे पर कोई ठोस हस्तक्षेप नहीं देखा गया है।
पाकिस्तान में ‘इमरान रिलीज फोर्स’ का गठन किसने और क्यों किया है?
खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी ने इस फोर्स के गठन का एलान किया है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को संगठित कर इमरान खान की रिहाई के लिए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और दबाव बनाना है।
अटक ब्रिज का सामरिक महत्व क्या है और वहां क्या स्थिति है?
अटक ब्रिज पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। इस पर कब्जे का मतलब है कि एक पूरे प्रांत का पाकिस्तान के बाकी हिस्सों से संपर्क टूट गया है। फिलहाल वहां हजारों प्रदर्शनकारी डटे हैं और सेना की भारी तैनाती की गई है।
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