इस्लामाबाद । पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर भारत द्वारा बनाए जा रहे नए हाइड्रोइलेक्ट्रिक डैम सावलकोट प्रोजेक्ट (Sawalcoat Projects) की समीक्षा शुरू कर दी है। भारत ने इस परियोजना की लागत करीब 5,129 करोड़ रुपये आंकी है। मोदी सरकार ने पिछले साल सिंधु जल संधि (Sindhu Water Treaty ) को सस्पेंड करने के बाद इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। पाकिस्तान इसे अपनी कृषि और सिंचाई व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बता रहा है।
चार बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने के निर्देश
सूत्रों के अनुसार, भारत ने चिनाब नदी पर चार प्रमुख हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को तय समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसमें पाकल दुल और किरू प्रोजेक्ट्स को दिसंबर 2026 तक शुरू करने और क्वार प्रोजेक्ट को मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा रतले डैम (Ratle Dam) पर भी युद्धस्तर पर निर्माण कार्य शुरू करने का आदेश दिया गया है।
सिंधु जल संधि सस्पेंड होने के बाद बदली रणनीति
सिंधु जल संधि सस्पेंड करने के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ डेटा साझा करने और पूर्व सूचना देने की बाध्यता को भी नहीं माना है। साथ ही, भारत ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसलों को गैर-कानूनी बताते हुए खारिज कर दिया है।
पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा है चिनाब नदी
चिनाब नदी को पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा माना जाता है। देश की करीब 90 प्रतिशत कृषि इसी नदी पर निर्भर है और डैम व नहरों का पूरा नेटवर्क इसी जल स्रोत पर आधारित है। पाकिस्तान के दस में से नौ नागरिक इसी पानी पर निर्भर बताए जाते हैं।
खेती और खाद्य संकट का डर
भारत के नए हाइड्रो प्रोजेक्ट को लेकर पाकिस्तान में चिंता गहराती जा रही है। पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि इससे वहां की खेती बुरी तरह प्रभावित हो सकती है और भूखमरी जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
पीएम कार्यालय को भेजी जाएगी संयुक्त रिपोर्ट
इस मुद्दे पर पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय, इंडस वॉटर कमिश्नर, विदेश मंत्रालय और अन्य संबंधित विभाग समीक्षा कर रहे हैं। खुफिया सूत्रों के अनुसार, एक संयुक्त रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपी जाएगी। साथ ही, डैम और डी-वाटरिंग से निपटने के लिए कई विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाने की तैयारी
पाकिस्तान भारत के इस प्रोजेक्ट को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चुनौती देने की तैयारी कर सकता है। वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी है और जल्द ही इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया दी जाएगी। पाकिस्तान पहले ही भारत के सिंधु जल संधि सस्पेंड करने के फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौती दे चुका है।
चिनाब नदी का इतिहास क्या है?
चिनाब नदी का प्राचीन नाम ‘असिक्नी’ था, जिसका अर्थ है – गहरे रंग की नदी। यह नदी हिमाचल प्रदेश के लाहौल में चंद्रा और भागा नदियों के संगम से निकलती है। जम्मू-कश्मीर से होकर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में प्रवेश करती है। करीब 1,200 किमी लंबी, यह नदी सिंधु नदी प्रणाली की एक प्रमुख सहायक है।
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