घर में आतंकवाद की मार और दुनिया को सुरक्षा देने का दिखावा
इस्लामाबाद: पाकिस्तान(Pakistan) इस समय अपने इतिहास के सबसे बुरे सुरक्षा संकट से गुजर रहा है। राजधानी इस्लामाबाद की मस्जिद में हुए बम धमाकों से लेकर बलूचिस्तान के 40% हिस्से पर सरकार का नियंत्रण खोने तक, हालात बेकाबू हैं। विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन के अनुसार, पाकिस्तान टीटीपी (TTP), बीएलए (BLA) और आईएसआईएस (ISIS) जैसे कट्टर दुश्मनों के बीच “सैंडविच” बन गया है। जहाँ एक ओर क्वेटा और अन्य प्रशासनिक केंद्रों पर लगातार हमले हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना इन आंतरिक खतरों से निपटने के बजाय विदेशी मिशनों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
मिडिल ईस्ट में सैन्य डिप्लोमेसी और रक्षा सौदों का प्रोपेगेंडा
अपनी आंतरिक विफलताओं के बावजूद, सेना प्रमुख असीम मुनीर खाड़ी और उत्तर अफ्रीकी देशों (MENA) को सुरक्षा गारंटी बेचने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान(Pakistan) दावा कर रहा है कि उसने लीबिया और सूडान जैसे देशों के साथ अरबों डॉलर के JF-17 फाइटर जेट और ड्रोन के सौदे किए हैं। वह खुद को एक ‘सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ के रूप में पेश कर रहा है और यहाँ तक कि गाजा में हमास से लड़ने के लिए अपनी सेना भेजने की चर्चाओं में भी शामिल है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह केवल आर्थिक संकट से जूझ रहे देश के लिए धन जुटाने और वैश्विक छवि सुधारने का एक खोखला प्रयास है।
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भारत के साथ आर्थिक तुलना और क्षमता का अभाव
अलजजीरा की रिपोर्ट और शोधकर्ता रियाज खोखर के अनुसार, पाकिस्तान की “सुरक्षा गारंटर” बनने की महत्वाकांक्षा उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था के कारण सफल नहीं हो सकती। जहाँ भारत का GCC (खाड़ी देशों) के साथ व्यापार 179 अरब डॉलर और निवेश 4.7 अरब डॉलर है, वहीं पाकिस्तान महज 2.5 अरब डॉलर के विदेशी निवेश पर टिका है। पाकिस्तान(Pakistan) अपनी जरूरतों के लिए सऊदी अरब और यूएई के कर्ज और आईएमएफ (IMF) की मदद पर निर्भर है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि जब तक पाकिस्तान अपनी आर्थिक स्थिति और आंतरिक आतंकवाद को नहीं संभालता, तब तक दूसरे देशों की रक्षा की गारंटी लेना एक “रणनीतिक बुरा सपना” बना रहेगा।
पाकिस्तान की ‘MENA डिप्लोमेसी’ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
पाकिस्तान की कोशिश मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के देशों को अपने हथियार (जैसे JF-17 जेट और ड्रोन) बेचना और खुद को एक सैन्य सुरक्षा गारंटर के रूप में स्थापित करना है, ताकि वह अपनी डूबती अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी मुद्रा जुटा सके।
विशेषज्ञ पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति को “रणनीतिक बुरा सपना” क्यों कह रहे हैं?
क्योंकि पाकिस्तान(Pakistan) एक साथ कई मोर्चों पर फंसा है-एक तरफ अफगानिस्तान सीमा पर अस्थिरता है, दूसरी तरफ बलूचिस्तान में अलगाववादी हमले बढ़ रहे हैं और राजधानी में आईएसआईएस सक्रिय है। अपनी सुरक्षा संभालने में नाकाम सेना का दूसरे देशों की रक्षा का दावा करना अव्यावहारिक लगता है।
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