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Pancreatic Cancer: पैंक्रियाटिक कैंसर पर वैज्ञानिकों की बड़ी जीत

Author Icon By Dhanarekha
Updated: January 30, 2026 • 5:15 PM
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तीन दवाओं के मिश्रण से चूहों में ट्यूमर हुआ पूरी तरह खत्म

मैड्रिड: स्पेन के ‘नेशनल कैंसर रिसर्च सेंटर’ के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने पैंक्रियाटिक कैंसर(Pancreatic Cancer) का एक प्रभावी इलाज खोज लिया है। करीब 6 साल तक चूहों पर किए गए शोध के बाद, प्रसिद्ध वैज्ञानिक मारियानो बार्बासिड की टीम ने तीन दवाओं को मिलाकर एक ऐसी थेरेपी तैयार की है, जिससे चूहों के पैंक्रियाज (अग्नाशय) का ट्यूमर(Tumor) जड़ से खत्म हो गया। सबसे बड़ी बात यह है कि इलाज के बाद चूहों में कैंसर दोबारा नहीं लौटा। यह वही खतरनाक कैंसर है जिसने 2011 में एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की जान ली थी

तीन दवाओं का घातक प्रहार: कैसे काम करती है यह थेरेपी?

वैज्ञानिकों ने पाया कि पैंक्रियाटिक कैंसर(Pancreatic Cancer) बहुत चालाकी से खुद को बदल लेता है, इसलिए इसे एक दवा से नहीं मारा जा सकता। इस नई थेरेपी में जेमसिटाबीन, ATRA और नेराटिनिब का एक साथ उपयोग किया गया है। जेमसिटाबीन कैंसर कोशिकाओं को मारती है, ATRA ट्यूमर के चारों ओर बनी कठोर सुरक्षात्मक परत को तोड़ती है, और नेराटिनिब उन संकेतों को ब्लॉक करती है जो ट्यूमर को बढ़ने में मदद करते हैं। इस ‘ट्रिपल अटैक’ ने कैंसर के बचने के सभी रास्ते बंद कर दिए, जिससे ट्यूमर को जीवित रहने का मौका नहीं मिला।

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पैंक्रियाटिक कैंसर की जटिलता और भविष्य की उम्मीद

इस कैंसर(Pancreatic Cancer) को सबसे जानलेवा इसलिए माना जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण नहीं दिखते और जब तक इसका पता चलता है, तब तक यह शरीर के अन्य अंगों में फैल चुका होता है। वर्तमान में केवल 10% मरीज ही इसके निदान के बाद 5 साल तक जीवित रह पाते हैं। हालांकि, इस रिसर्च के नतीजे PNAS जर्नल में प्रकाशित होने के बाद विशेषज्ञों में उत्साह है। अब अगला कदम इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल शुरू करना है। हालांकि इसमें अभी समय लगेगा, लेकिन यह खोज साबित करती है कि सही दवाओं के संयोजन से इस लाइलाज मानी जाने वाली बीमारी को हराया जा सकता है।

पैंक्रियाटिक कैंसर के दो मुख्य प्रकार कौन से हैं?

पहला है एक्सोक्राइन पैंक्रियाटिक कैंसर(Pancreatic Cancer), जो सबसे सामान्य है और नलिकाओं में विकसित होता है। दूसरा है न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर (NETs), जो हार्मोन बनाने वाली कोशिकाओं में बनता है और अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ता है।

क्या यह इलाज अभी आम जनता के लिए उपलब्ध है?

नहीं, अभी यह रिसर्च केवल चूहों पर सफल रही है। इंसानों पर इसके परीक्षण और सुरक्षा जांच अभी बाकी हैं। इसमें कुछ वर्ष लग सकते हैं, लेकिन यह रिसर्च भविष्य के इलाज के लिए एक ठोस आधार प्रदान करती है।

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