नई दिल्ली। पश्चिम-एशिया क्षेत्र में ईरान और अमेरिका (Iran and america) के बीच जारी भीषण युद्ध के दौर में भारत में चाबहार बंदरगाह के मुद्दे की गूंज सुनाई दी है। इस बार इसका जिक्र सरकार की ओर से नहीं बल्कि विदेश मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति द्वारा मंगलवार को संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालिया घटनाक्रम की वजह से बंदरगाह विकास की परियोजना खतरे में है। देश के लिए चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) रणनीतिक रूप से एक बेहद महत्वपूर्ण बंदरगाह है। उक्त संघर्ष, अमेरिका की ओर से बीते वक्त में इसके निर्माण कार्य पर लगाई गई पाबंदी और टैरिफ जैसे कुछ निर्णयों का इस पर खासा असर देखने को मिला है।
समिति ने जताई चिंता, संवाद बनाए रखने की सलाह
समिति ने मामले के प्रभावों को लेकर सरकार द्वारा सभी भागीदार पक्षों से संवाद के क्रम को लगातार बनाए रखने के कदम का स्वागत किया है। यहां बता दें कि मंत्रालय की वर्ष 2026-27 की अनुदान मांगों पर समिति की यह 12वीं रिपोर्ट थी, जिसे 17 मार्च को संसद में पेश किया गया। समिति की अध्यक्षता कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर कर रहे हैं।
रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है चाबहार
समिति ने रिपोर्ट में कहा कि चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जिससे उसे अफगानिस्तान और मध्य एशिया में सीधे प्रवेश करने का अवसर मिलेगा। साथ ही यह बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर से जुड़ने में भी अहम भूमिका निभाता है। समिति ने इस संबंध में योजनाओं और प्रगति को लेकर मंत्रालय से लगातार जानकारी साझा करने को कहा है।
अमेरिकी फैसलों का भी पड़ा असर
रिपोर्ट में पिछले साल सितंबर महीने में अमेरिका द्वारा 2018 में लगाई गई पाबंदियों को वापस लेने के फैसले का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, क्षेत्रीय तनाव और नीतिगत बदलावों का असर अब भी परियोजना पर दिखाई दे रहा है।
बजट आवंटन और खर्च की स्थिति
समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान में चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए विदेश मंत्रालय ने 100 करोड़ रुपए आवंटित किए थे, जिसे संशोधित अनुमान में बढ़ाकर 400 करोड़ रुपए कर दिया गया। यह पूरी राशि जनवरी 2026 तक खर्च कर ली गई है।
Read Also : MP- EV चार्जिंग हादसा बना मौत का जाल, इंदौर में 8 की जिंदा जलकर मौत, कई सिलेंडर फटे
नए बजट में नहीं मिला फंड
मंत्रालय ने समिति को बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में चाबहार परियोजना के लिए कोई नई धनराशि आवंटित नहीं की गई है। इसका कारण यह बताया गया कि भारत अपनी 120 मिलियन डॉलर की प्रतिबद्धता पहले ही पूरी कर चुका है, जिसमें बंदरगाह के लिए उपकरणों की खरीद शामिल है। यह प्रतिबद्धता वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते का हिस्सा थी।
Read More :