IRAN- संकट के दौर में रूस का साथ, भारत को 95 लाख बैरल कच्चा तेल देने को तैयार

By Anuj Kumar | Updated: March 5, 2026 • 12:44 PM

मास्को,। मध्य पूर्व में गहराते सैन्य संघर्ष और तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट खड़ा हो गया है। सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण (Strait of Hormuz) से कच्चे तेल की आवाजाही का रास्ता बंद होने से भारत सहित दुनिया भर के देशों के लिए आपूर्ति शृंखला बाधित हो गई है। ऐसे में भारत के पुराने मित्र (Russia) ने संकटमोचक की भूमिका निभाते हुए कच्चे तेल की खेप को भारत की ओर मोड़ने की तत्परता दिखाई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान में भारतीय जलक्षेत्र के पास अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर लगभग 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल मौजूद है, जिसे कुछ ही हफ्तों के भीतर भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचाया जा सकता है।

मध्य पूर्व संकट से प्रभावित तेल आपूर्ति

यह विकासक्रम भारत के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि (India) अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 50 प्रतिशत तेल मध्य पूर्व के देशों से आयात करता रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता के कारण यह मार्ग अब असुरक्षित हो गया है, जिससे शिपमेंट बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। हालांकि जहाजों पर लदे इस रूसी तेल का मूल गंतव्य स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि गैर-रूसी बेड़े के जहाजों द्वारा ले जाए जा रहे इस माल को भारत की तत्काल आवश्यकता को देखते हुए जल्दी से डायवर्ट किया जा सकता है।

भारत के सीमित तेल भंडार की चुनौती

भारत की वर्तमान स्थिति की बात करें तो देश के पास अभी सीमित तेल भंडार मौजूद है। रिपोर्टों के अनुसार, भारत के पास कच्चे तेल का भंडार लगभग 25 दिनों की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए ही पर्याप्त है। इसके अलावा डीजल, पेट्रोल और पेट्रोलियम गैस जैसे रिफाइंड उत्पादों का स्टॉक भी लगातार कम हो रहा है।

रिफाइनरियों पर बढ़ता दबाव

भारतीय रिफाइनरियां प्रतिदिन लगभग 5.6 मिलियन बैरल तेल को रिफाइन करती हैं, जिसका अर्थ है कि शिपिंग मार्गों में जरा सी भी लंबी रुकावट देश में ईंधन की भारी किल्लत पैदा कर सकती है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि नई दिल्ली ने वैकल्पिक आपूर्ति विकल्पों की तलाश तेज कर दी है, क्योंकि अंदेशा है कि मध्य पूर्व का यह संघर्ष अगले 10-15 दिनों तक और खिंच सकता है।

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भारत की ऊर्जा सुरक्षा में रूस की भूमिका

इस अनिश्चितता के बीच रूस ने संकेत दिया है कि वह इस आपूर्ति अंतराल को पाटने के लिए पूरी तरह तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस संभावित रूप से भारत की कुल कच्चे तेल की जरूरतों का 40 प्रतिशत तक हिस्सा अकेले पूरा कर सकता है। यदि यह व्यवस्था सुचारू रूप से लागू होती है, तो वैश्विक संकट के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने में सफल रहेगा।

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