USA-अंतरिक्ष टकराव का खतरा, स्पेसएक्स 4,400 सैटेलाइट की कक्षा बदलेगा

By Anuj Kumar | Updated: January 31, 2026 • 1:43 PM

वॉशिंगटन। दुनिया भर में सैटेलाइट इंटरनेट (Satelite Internet) की क्रांति लाने का दावा करने वाले एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को अंतरिक्ष में चीन से एक बड़ा झटका लगा है। चीन के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में यह चौंकाने वाला दावा किया गया है कि एक चीनी सैटेलाइट और स्टारलिंक सैटेलाइट के बीच हुई क्लोज अप्रोच यानी बेहद नजदीकी की घटना के बाद स्पेसएक्स को अपने 4,400 से ज्यादा सैटेलाइट्स की कक्षा (Obrite) बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यह अंतरिक्ष के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और जटिल बदलाव माना जा रहा है।

200 मीटर की दूरी पर टल गई थी टक्कर

चीनी एकेडमी ऑफ साइंसेज से जुड़े शोधकर्ताओं की इस रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 10 दिसंबर की है। स्पेसएक्स के इंजीनियरिंग वाइस प्रेसिडेंट माइकल निकोल्स ने भी सोशल मीडिया पर स्वीकार किया था कि एक चीनी रॉकेट लॉन्च के तुरंत बाद उनका एक स्टारलिंक सैटेलाइट और एक अन्य सैटेलाइट एक-दूसरे से मात्र 200 मीटर की दूरी से गुजरे थे। अंतरिक्ष विज्ञान के पैमाने पर यह दूरी लगभग शून्य मानी जाती है और विशेषज्ञों ने इसे सीधी टक्कर का गंभीर खतरा बताया था।

4,400 सैटेलाइट्स की कक्षा बदलने का फैसला

इस घटना के कुछ ही हफ्तों बाद स्पेसएक्स (SpaceX) ने अपने लगभग आधे परिचालन सैटेलाइट्स को 550 किलोमीटर की ऊंचाई से घटाकर 480 किलोमीटर की निचली कक्षा में लाने की योजना का खुलासा किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अंतरिक्ष में बढ़ते टकराव के खतरे को देखते हुए लिया गया है।

निचली कक्षा में जाने के फायदे और नुकसान

स्पेसएक्स का तर्क है कि 480 किलोमीटर की निचली कक्षा में वायुमंडलीय खिंचाव अधिक होता है, जिससे खराब सैटेलाइट जल्दी पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जल जाते हैं और अंतरिक्ष मलबा नहीं बनते। हालांकि, इसका दूसरा पहलू यह है कि निचली कक्षा में सैटेलाइट्स को अपनी ऊंचाई बनाए रखने के लिए ज्यादा ईंधन खर्च करना पड़ता है, जिससे उनकी कार्य अवधि कम हो सकती है और कंपनी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पहले भी स्टारलिंक पर आपत्ति जता चुका है चीन

चीन इस मुद्दे पर पहले से ही सख्त रुख अपनाए हुए है। वर्ष 2021 में चीन ने अपने तियांगोंग स्पेस स्टेशन के पास स्टारलिंक सैटेलाइट्स के आने की शिकायत की थी। चीन का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर सैटेलाइट्स तैनात करना अंतरिक्ष सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

केसलर सिंड्रोम का खतरा

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि 4,400 सैटेलाइट्स को एक साथ नीचे लाने की प्रक्रिया शुरू होती है और इस दौरान कोई तकनीकी गड़बड़ी होती है, तो केसलर सिंड्रोम जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इसमें एक टक्कर के बाद मलबा अन्य सैटेलाइट्स से टकराकर चेन रिएक्शन शुरू कर देता है, जिससे पूरे अंतरिक्ष नेटवर्क को नुकसान पहुंच सकता है।

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अंतरराष्ट्रीय नियमों की जरूरत पर बढ़ी बहस

यह मामला अब वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। संचार, इंटरनेट और वैश्विक सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बढ़ती सैटेलाइट भीड़ और नजदीकी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि भविष्य में अंतरिक्ष को सुरक्षित रखने के लिए देशों और निजी कंपनियों के बीच सख्त अंतरराष्ट्रीय नियम और बेहतर समन्वय बेहद जरूरी हो गया है।

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