Sri Lanka flood recovery : श्रीलंका आपदा में उजली मानवता | डिटवाह के बाद उभरी स्वयंसेवा…

By Sai Kiran | Updated: December 3, 2025 • 11:06 AM

Sri Lanka flood recovery : चक्रवात डिटवाह ने श्रीलंका में भारी तबाही मचाई है। बाढ़ और भूस्खलनों ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली है, लेकिन इस संकट के बीच देश में मानवता और स्वयंसेवा की भावना भी मजबूती से उभरी है।

श्रीलंकाई अभिनेता और संगीतकार जीके रेजिनोल्ड कोलंबो के उपनगरीय इलाकों में मोटर से चलने वाली मछली पकड़ने वाली नाव से भोजन और पीने का पानी पहुंचा रहे हैं। उनका कहना है कि कई परिवार ऐसे हैं जिन्हें कई दिनों से कोई मदद नहीं मिली है।

पिछले सप्ताह आए डिटवाह चक्रवात के कारण देश में भीषण बाढ़ और भूस्खलन हुए, जिनमें 460 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। लगभग 30,000 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसे हाल के वर्षों में देश की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा बताया जा रहा है।

हालांकि इस आपदा ने लोगों को एकजुट कर दिया है। राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायके ने इसे देश के इतिहास की “सबसे चुनौतीपूर्ण प्राकृतिक आपदा” बताया है।

“मैं बस इतना चाहता था कि कम से कम उन्हें एक वक्त का भोजन मिल जाए। यह कर पाने की खुशी शब्दों में नहीं समझाई जा सकती,” रेजिनोल्ड ने कहा।

इस आपदा से दस लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और देश में आपातकाल घोषित किया गया है। राहत और बचाव कार्यों के लिए सेना के हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं, वहीं विदेशी सरकारों और गैर-सरकारी संगठनों की ओर से मदद पहुंच रही है।

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सामुदायिक रसोई में जुटे स्वयंसेवक

कोलंबो के विजेरामा इलाके में, 2022 में पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के खिलाफ हुए आंदोलनों में शामिल कार्यकर्ता अब सामुदायिक रसोई चला रहे हैं और भोजन तैयार कर रहे हैं।

सोशल मीडिया एक्टिविस्ट ससिंदु सहान थरका ने बताया कि कई स्वयंसेवक काम के बाद, तो कुछ छुट्टी लेकर राहत कार्यों में जुटे हैं। जैसे ही चक्रवात की खबर मिली, पुराने नेटवर्क को दोबारा सक्रिय कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि यह रसोई 2016 की बाढ़ के दौरान किए गए उनके स्वयंसेवा कार्य का ही विस्तार है, जब पूरे देश में 250 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

स्वयंसेवकों ने सैकड़ों मदद की मांगों को संकलित कर प्रशासन तक (Sri Lanka flood recovery) पहुंचाया और जरूरतमंदों तक भोजन वितरित किया। उन्होंने बताया कि समुदाय की ओर से जरूरत से कहीं ज्यादा मदद मिली है।

ऑनलाइन राहत अभियान

सोशल मीडिया पर भी राहत अभियानों की बाढ़ आ गई है। दान और स्वयंसेवकों के लिए एक सार्वजनिक डेटाबेस तैयार किया गया है। एक अन्य वेबसाइट दानदाताओं को यह बताती है कि किस राहत शिविर में किस चीज़ की सबसे अधिक जरूरत है।

निजी कंपनियों ने दान अभियान शुरू किए हैं, जबकि स्थानीय टीवी चैनल भोजन, साबुन और टूथब्रश जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए मदद जुटा रहे हैं।

तैयारियों को लेकर आलोचना झेल रहे राष्ट्रपति दिसानायके ने सभी श्रीलंकाइयों से राजनीतिक मतभेद भुलाकर देश के पुनर्निर्माण में एकजुट होने की अपील की है।

विपक्षी नेताओं ने मौसम विभाग की चेतावनियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। संसद में इस मुद्दे पर बहस पर रोक लगाए जाने के विरोध में विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट भी किया।

हालांकि ज़मीनी स्तर पर एकजुटता साफ दिखाई दे रही है। लोग बाढ़ के बाद जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।

“किसी की जान बचाने में मदद कर पाना ही हमारी सारी थकान मिटा देता है,” सहान ने फेसबुक पोस्ट में लिखा। “आपदाएं हमारे लिए नई नहीं हैं, लेकिन हमारे दिलों की संवेदनशीलता इस विनाश से कहीं बड़ी है।”

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