टोक्यो। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब पूर्वी एशिया में भी सैन्य हलचल तेज हो गई है। जापान (Japan) ने अपनी रक्षा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए लंबी दूरी की मिसाइलों की तैनाती शुरू कर दी है, जिसका सीधा असर चीन पर पड़ सकता है।
1000 किमी तक मार करने में सक्षम मिसाइलें
जापान का अपग्रेडेड टाइप-12 मिसाइल सिस्टम (Missile System) अब करीब 1000 किलोमीटर तक वार करने में सक्षम हो गया है। यह क्षमता चीन के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदल सकता है।
ताइवान मुद्दे पर जापान का सख्त रुख
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने संकेत दिया है कि यदि चीन ताइवान (China Taiwan) के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है, तो जापान भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है। नई रणनीति के तहत जापान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में बदलाव कर मानवरहित हथियारों और लंबी दूरी की मिसाइलों पर जोर दे रहा है।
गुप्त तरीके से हो रही तैनाती, स्थानीय स्तर पर विरोध
इन मिसाइलों की तैनाती कुमामोटो प्रांत के कैंप केंगुन में की जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारी मिसाइल लॉन्चर्स को आधी रात में गुप्त तरीके से वहां पहुंचाया गया। सरकार द्वारा पहले से जानकारी न देने के कारण स्थानीय लोगों और प्रशासन में नाराजगी भी देखने को मिल रही है।
गवर्नर ने जताई नाराजगी, सरकार ने दी सफाई
कुमामोटो के गवर्नर ताकाशी किमुरा ने इस गोपनीयता पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस तैनाती की जानकारी मीडिया के जरिए मिली, जो चिंता का विषय है। हालांकि, क्षेत्रीय रक्षा अधिकारियों ने बताया कि 31 मार्च से पहले स्थानीय प्रतिनिधियों को उपकरणों की जानकारी दी जाएगी।
मिसाइल क्षमता में बड़ा इजाफा, चीन की गतिविधियों पर नजर
मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित यह टाइप-12 मिसाइल पहले 200 किलोमीटर तक ही मार कर सकती थी, लेकिन अब इसकी क्षमता पांच गुना बढ़ाई जा चुकी है। जापान ने ओकिनावा, इशिगाकी और मियाको द्वीपों पर पहले ही पीएसी-3 इंटरसेप्टर तैनात कर दिए हैं और योनागुनी द्वीप पर भी आगे और मिसाइल तैनाती की योजना बना रहा है।
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ताइवान के आसपास बढ़ती हलचल से बढ़ी चिंता
यह सैन्य तैनाती ऐसे समय में हो रही है जब चीन की गतिविधियां ताइवान के आसपास तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में जापान का यह कदम पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नई रणनीतिक हलचल का संकेत माना जा रहा है।
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