दुबई । दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में गिने जाने वाला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuzz) अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ‘टोल प्लाजा’ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी (IRGC) इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों और तेल टैंकरों से भारी शुल्क वसूल रही है।
टैंकरों से करोड़ों की वसूली
बताया जा रहा है कि तेल टैंकरों (Oil Tanker) के लिए शुरुआती शुल्क प्रति बैरल 1 डॉलर तय किया गया है। एक वेरी लार्ज क्रूड कैरियर (VLCC), जिसकी क्षमता करीब 20 लाख बैरल होती है, उसे पार कराने के लिए ईरान करीब 20 मिलियन डॉलर (लगभग 168 करोड़ रुपये) तक वसूल रहा है।
पाकिस्तान का अजीब प्रस्ताव
इस बीच पाकिस्तान का एक चौंकाने वाला प्रस्ताव भी सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को अपने झंडे का इस्तेमाल करने का विकल्प दिया है, क्योंकि ईरान ने उसके 20 जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने का आश्वासन दिया था।
डॉलर नहीं, युआन और क्रिप्टो में भुगतान
सबसे दिलचस्प बात यह है कि ईरान इस शुल्क को अमेरिकी डॉलर में नहीं, बल्कि चीनी मुद्रा युआन और क्रिप्टोकरेंसी में स्वीकार कर रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचा जा सके।
सख्त जांच के बाद मिलती है अनुमति
रिपोर्ट के अनुसार, अब केवल नौसेना की अनुमति पर्याप्त नहीं है। जहाज संचालकों को पहले आईआरजीसी से जुड़ी एक मध्यस्थ कंपनी से संपर्क करना होता है, जो जहाज के मालिक, चालक दल और कार्गो की गहन जांच करती है। जब यह सुनिश्चित हो जाता है कि जहाज का संबंध अमेरिका, इजरायल या किसी अन्य शत्रु देश से नहीं है, तब उसे एक विशेष परमिट कोड जारी किया जाता है। इस कोड को रेडियो पर प्रसारित करने के बाद ही जहाज को आगे बढ़ने की अनुमति मिलती है।
देशों के अनुसार अलग-अलग शुल्क
ईरान ने इस टोल वसूली के लिए देशों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है। चीन और रूस जैसे मित्र देशों के लिए शुल्क कम रखा गया है, जबकि अन्य देशों के लिए यह काफी महंगा है।
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वैश्विक व्यापार पर बढ़ता दबाव
अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ इसे समुद्री कानूनों और ‘निर्दोष मार्ग’ के सिद्धांत का उल्लंघन मान रहे हैं। हालांकि, ईरान इसे आत्मरक्षा का अधिकार बताकर सही ठहराने की कोशिश कर रहा है। इस स्थिति से वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है—जहाजों के बीमा प्रीमियम बढ़ गए हैं और आपूर्ति में देरी के कारण महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है। दुनिया की लगभग 20% तेल और एलएनजी आपूर्ति इसी मार्ग से गुजरती है, जिससे यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन गया है।
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