पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व वाणिज्य मंत्री गोहर एजाज ने चेतावनी दी है कि भारत-EU डील(Trade Deal) के बाद पाकिस्तान का यूरोपीय बाजार में बिना टैक्स वाला दबदबा खत्म हो चुका है। अब तक पाकिस्तान ‘जीएसपी प्लस’ योजना के तहत अपने 66% उत्पाद बिना किसी टैक्स के यूरोप भेजता था, जबकि भारत को 9 से 12% टैक्स देना पड़ता था। अब भारत को शून्य टैक्स(Zero Tax) की सुविधा मिलने से पाकिस्तान की यह बढ़त खत्म हो जाएगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि निर्यात में गिरावट आने से पाकिस्तान के टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर से जुड़ी करीब 1 करोड़ नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
भारतीय निर्यात को मिलेगी भारी बढ़त: ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
18 साल की लंबी बातचीत के बाद हुई इस डील को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है। इसके लागू होने से भारत के करीब 95% लेबर-बेस्ड उत्पाद (जैसे कपड़े, जूते और समुद्री उत्पाद) बिना किसी कस्टम ड्यूटी के यूरोपीय बाजार(Trade Deal) में प्रवेश कर सकेंगे। इससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता (Competitiveness) कई गुना बढ़ जाएगी। दूसरी ओर, पाकिस्तान की जीएसपी प्लस सुविधा दिसंबर 2027 में समाप्त होने वाली है, जिससे उसकी मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।
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भारत में लग्जरी कारों और वाइन के शौकीनों के लिए खुशखबरी
इस समझौते का असर केवल निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के घरेलू बाजार पर भी पड़ेगा। साल 2027 तक इस डील के लागू होने की संभावना है, जिसके बाद मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू (BMW) जैसी यूरोपीय कारों पर लगने(Trade Deal) वाली 110% इंपोर्ट ड्यूटी घटकर मात्र 10% रह जाएगी। इसके अलावा, विदेशी वाइन और शराब पर लगने वाला 150% टैक्स भी घटकर 20-30% के स्तर पर आ सकता है। इससे भारतीय उपभोक्ताओं के लिए वैश्विक लग्जरी ब्रांड्स काफी सस्ते और सुलभ हो जाएंगे।
पाकिस्तान को यूरोपीय बाजार में भारत पर अब तक क्या बढ़त हासिल थी?
पाकिस्तान को यूरोपीय संघ की ‘जीएसपी प्लस’ (GSP+) योजना का लाभ मिल रहा था, जिसके तहत वह बिना किसी टैक्स के कपड़े और अन्य सामान यूरोप भेजता था। वहीं भारत को इन्ही सामानों पर 9 से 12% तक का भारी टैक्स देना पड़ता था, जिससे पाकिस्तानी सामान यूरोपीय बाजारों में सस्ते बिकते थे।
भारत-EU एफटीए (FTA) से भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा?
इस समझौते के बाद यूरोप से आने वाली लग्जरी कारों पर आयात शुल्क 110% से घटकर 10% हो जाएगा। इससे भारतीय बाजार में विदेशी प्रीमियम कारों की कीमतें काफी कम हो जाएंगी और यूरोपीय कार कंपनियों को भारत में अपना बाजार फैलाने का बड़ा मौका मिलेगा।
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