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डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर सिर्फ चीन, टैरिफ की लड़ाई- किसे होगा नुकसान

Author Icon By digital@vaartha.com
Updated: April 10, 2025 • 9:59 AM
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जहां ट्रंप ने चीन पर 125 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने बाकी सभी देशों को नए टैरिफ रेट से 90 दिनों के लिए राहत दे दी।

डोनाल्ड ट्रंप जिस दिन से अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, उस दिन से पूरी दुनिया में किसी-न-किसी बात को लेकर हलचल मची हुई है। हालांकि, इन दिनों अमेरिकी टैरिफ ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसी बीच, अमेरिका और चीन में चल रहे टैरिफ वॉर से चिंताएं बढ़ गई हैं। ट्रंप ने चीन पर पहले 34 प्रतिशत का टैरिफ लगाने का ऐलान किया था, जिसके बाद चीन ने भी अमेरिका पर 34 प्रतिशत का जवाबी टैरिफ लगा दिया था। यहां से दोनों देशों के बीच टैरिफ वॉर शुरू हो गया। 

अमेरिका ने चीन पर लगाए टैरिफ को बढ़ाकर 125% किया

ट्रंप ने चीन को धमकी दी कि अगर उन्होंने जवाब टैरिफ नहीं हटाया तो 50 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा, यानी 34+50=84 प्रतिशत। अब चीन भी अमेरिका के सामने इतनी आसानी से झुकने वाला नहीं है। लिहाजा, चीन ने अमेरिका की धमकी के बावजूद 34 प्रतिशत का जवाबी शुल्क नहीं हटाया। इससे गुस्साए ट्रंप ने चीन पर 84 प्रतिशत की बजाय सीधे 104 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। ट्रंप के इस कदम के बाद चीन ने भी अपनी चाल चली और अमेरिका पर जवाबी टैरिफ को 34 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 84 प्रतिशत कर दिया। अब चीन के इस कदम से झल्लाए ट्रंप ने बुधवार को चीन पर लगाए गए टैरिफ को 104 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 125 प्रतिशत कर दिया।

दोनों देशों के रिश्तों में बढ़ती जा रही है कड़वाहट

बुधवार को जहां ट्रंप ने चीन पर 125 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने बाकी सभी देशों को नए टैरिफ रेट से 90 दिनों के लिए राहत दे दी। यानी दुनिया के बाकी देशों पर अमेरिकी टैरिफ पर 90 दिनों के लिए रोक लगा दी गई है। इससे चीन और अमेरिका के रिश्तों में कड़वाहट बढ़ती हुई नजर आ रही है। ऐसे में साफतौर पर समझा जा सकता है कि ट्रंप का सीधा निशाना सिर्फ और सिर्फ चीन पर है। हालांकि, दोनों देशों के बीच छिड़े टैरिफ वॉर से सिर्फ चीन और अमेरिका को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को नुकसान होगा।

मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे बड़ा प्लेयर है चीन

जहां एक तरफ ट्रंप चीन को लेकर बिल्कुल क्लियर हो गए हैं तो वहीं दूसरी ओर चीन भी झुकने के लिए तैयार नहीं है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा था कि उनका देश अंत तक ये लड़ाई लड़ेगा। बताते चलें कि चीन और अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्तियां हैं। चीन इस दुनिया का सबसे बड़ा मैन्यूफैक्चरर है और इसका मार्केट शेयर 30 प्रतिशत है। चीन सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की जरूरतों को पूरा करता है।

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