USA- ट्रंप का दावा- मेरे हस्तक्षेप से बची पाक पीएम शहबाज शरीफ की जान

By Anuj Kumar | Updated: February 25, 2026 • 11:33 AM

Washington, D.C.,। अमेरिकी राष्ट्रपति (Donald Trump) ने भारत और पाकिस्तान के बीच उपजे तनाव को लेकर एक बार फिर चौंकाने वाला दावा किया है। बुधवार को दिए अपने ताजा बयान में ट्रंप ने कहा कि यदि उन्होंने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री (Shehbaz Sharif) अपनी जान गंवा देते। अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन के दौरान उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को रुकवाने में अपनी भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।

ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र और बड़ा दावा

ट्रंप ने विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इस सैन्य कार्रवाई को रुकवाने के लिए दखल दिया, जिससे न केवल पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की रक्षा हुई, बल्कि एक बड़ी मानवीय त्रासदी भी टल गई। ट्रंप के मुताबिक, अगर वह हस्तक्षेप नहीं करते तो इस संघर्ष में कम से कम 35 मिलियन (साढ़े तीन करोड़) पाकिस्तानियों की मौत हो सकती थी। गौरतलब है कि भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी।

परमाणु युद्ध और व्यापारिक प्रतिबंधों की चेतावनी

पूर्व में भी कई बार परमाणु युद्ध रुकवाने का श्रेय ले चुके ट्रंप ने खुलासा किया कि फरवरी 2026 में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दोनों देशों को सख्त लहजे में चेतावनी दी थी। उन्होंने दावा किया कि युद्ध रोकने के लिए उन्होंने भारत और पाकिस्तान, दोनों पर 200 प्रतिशत ट्रेड टैरिफ (व्यापार शुल्क) लगाने की धमकी दी थी। ट्रंप के अनुसार, दोनों देश लड़ना बंद करने को तैयार नहीं थे, लेकिन जब व्यापार पूरी तरह ठप होने का डर सामने आया, तब वे समझौते की मेज पर आए।

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लड़ाकू विमानों की संख्या पर विरोधाभास

ट्रंप ने इस ऑपरेशन के दौरान नष्ट हुए विमानों की संख्या को लेकर भी नए आंकड़े पेश किए हैं। शुरुआत में उन्होंने 6 से 7 विमानों के गिरने की बात कही थी, लेकिन अब उन्होंने इस संख्या को बढ़ाकर 11 लड़ाकू विमान कर दिया है। हालांकि, भारत या पाकिस्तान की ओर से आधिकारिक तौर पर इतने बड़े नुकसान की पुष्टि कभी नहीं की गई है।

भारत सरकार ने ट्रंप के इन दावों के विपरीत हमेशा यह रुख स्पष्ट रखा है कि कश्मीर या सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा पूरी तरह द्विपक्षीय है और इसमें किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की गई है।

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