वॉशिंगटन। Donald Trump ने ईरान को लेकर एक बार फिर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अमेरिका और (Iran) के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति (Barack Obama) की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ईरान ने दशकों तक अमेरिका को गुमराह किया, लेकिन अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
ओबामा की नीतियों पर ट्रंप का हमला
ट्रंप ने 2015 के परमाणु समझौते का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि ओबामा प्रशासन ने प्रतिबंधों में ढील देकर और भारी आर्थिक राहत देकर ईरान को मजबूत किया। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में ईरान को अरबों डॉलर की मदद दी गई, जिसमें नकद राशि भी शामिल थी। ट्रंप (Trump) ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ईरान को लगा था कि उसे सबसे कमजोर अमेरिकी नेतृत्व मिल गया है, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और अमेरिका उसकी हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है।
शांति प्रस्ताव को बताया अस्वीकार्य
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी पुष्टि की कि वॉशिंगटन की ओर से ईरान को शांति प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन तेहरान की प्रतिक्रिया को उन्होंने “पूरी तरह गलत और अस्वीकार्य” बताते हुए खारिज कर दिया। हालांकि ट्रंप ने ईरान के जवाब का विस्तृत खुलासा नहीं किया। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान ने युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा, आर्थिक प्रतिबंध हटाने और हॉर्मोज जलडमरूमध्य पर अपने अधिकार की मांग रखी थी। साथ ही पूरे क्षेत्र में संघर्ष समाप्त करने की बात भी कही गई थी।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव
तनाव के बीच खाड़ी देशों में ड्रोन गतिविधियां बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। वहीं कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान अपने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के एक हिस्से को पतला करने या किसी तीसरे देश को सौंपने पर विचार कर रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।इस बीच Benjamin Netanyahu ने कहा कि ईरान के खिलाफ लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है और उसके समृद्ध यूरेनियम को हटाना बेहद जरूरी है। उन्होंने जरूरत पड़ने पर कड़े कदम उठाने के संकेत भी दिए।
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ईरान ने झुकने से किया इनकार
वहीं ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ कहा कि उनका देश किसी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं होता और ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा।
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