वॉशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (America President Donald Trump) ने अपनी अमेरिका फर्स्ट नीति को एक नए और आक्रामक स्तर पर ले जाते हुए वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने न केवल ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की अपनी पुरानी मांग को दोहराया है, बल्कि हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दीएगो गार्सिया द्वीप (Diego Garcia Island) को लेकर ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुए समझौते की भी तीखी आलोचना की है। ट्रंप का यह रुख दुनिया भर में भू-राजनीतिक अस्थिरता की आशंकाओं को जन्म दे रहा है, क्योंकि वे खुलेआम कनाडा और वेनेजुएला जैसे देशों को भी अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा बता रहे हैं। इससे भारत के लिए भी संकट की स्थिति बन सकती है।
ग्रीनलैंड से दीएगो गार्सिया तक ट्रंप की आक्रामक नीति
डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर रणनीतिक क्षेत्रों पर नियंत्रण को लेकर अब और आक्रामक रुख अपना सकता है। ग्रीनलैंड के बाद दीएगो गार्सिया को लेकर उनकी टिप्पणियों ने यह साफ कर दिया है कि ट्रंप वैश्विक भू-राजनीति में दबाव की राजनीति को खुलकर अपनाने के पक्षधर हैं।
दीएगो गार्सिया क्यों है भारत के लिए संवेदनशील
दीएगो गार्सिया का मुद्दा भारत के लिए भी बेहद अहम है। हालांकि ट्रंप ने अपने हालिया बयान में भारत का नाम नहीं लिया, लेकिन भारत ने ब्रिटेन और मॉरीशस (Britain and Marisa’s) के बीच हुए इस समझौते का खुलकर समर्थन किया है। दीएगो गार्सिया चागोस द्वीप समूह का सबसे बड़ा हिस्सा है, जहां 1960 के दशक से अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य अड्डा संचालित है। यह अड्डा मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और पूर्वी अफ्रीका में अमेरिकी सैन्य अभियानों का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
चागोस विवाद का लंबा इतिहास
1965 में ब्रिटेन ने चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस से अलग कर दिया था, जिसके बाद वहां के मूल निवासियों को जबरन विस्थापित किया गया। लंबे कानूनी और कूटनीतिक संघर्ष के बाद मई 2025 में हुए समझौते के तहत चागोस की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने और दीएगो गार्सिया को 99 साल की लीज पर ब्रिटेन के पास रखने का निर्णय लिया गया।
अन्य पढ़े: Rajasthan- सुप्रीम कोर्ट का आदेश, हाईवे किनारे शराब दुकानें बंद नहीं होंगी
ट्रंप का तीखा हमला और पश्चिमी सहयोगियों को चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर ब्रिटेन की इस योजना को “पूर्ण कमजोरी” और “बड़ी मूर्खता” करार दिया। उन्होंने कहा कि एक नाटो सहयोगी बिना किसी ठोस कारण के ऐसे क्षेत्र को छोड़ रहा है, जहां एक महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य अड्डा मौजूद है। ट्रंप ने चेताया कि चीन और रूस जैसी शक्तियां पश्चिमी देशों की इस कमजोरी पर नजर रखे हुए हैं।
Read More :