Trump: ट्रंप का मास्टरप्लान: ईरान पर पहले हमला करे इजरायल

By Dhanarekha | Updated: February 26, 2026 • 4:36 PM

फिर अमेरिका संभालेगा मोर्चा

वाशिंगटन: पॉलिटिको की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप(Trump) की कोर टीम ईरान के खिलाफ एक विशेष सैन्य रणनीति पर काम कर रही है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यदि इजरायल पहले ईरान पर हमला करता है और उसके जवाब में ईरान अमेरिका को निशाना बनाता है, तो ट्रंप प्रशासन के लिए ईरान के खिलाफ सीधे युद्ध(War) की घोषणा करना आसान हो जाएगा। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य इजरायल की कार्रवाई को एक ‘ट्रिगर’ के रूप में इस्तेमाल करना है, ताकि अमेरिका के सैन्य हस्तक्षेप को ‘जवाबी कार्रवाई’ और ‘आत्मरक्षा’ के रूप में पेश किया जा सके

अमेरिकी जनता और MAGA समर्थकों का रुख

ट्रंप प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी जनता(Trump) और खासकर उनके ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) समर्थकों को युद्ध के लिए तैयार करना है। अधिकांश अमेरिकी मतदाता ईरान में शासन परिवर्तन तो चाहते हैं, लेकिन वे अमेरिकी सैनिकों के सीधे युद्ध में शामिल होने और होने वाले जानी नुकसान के खिलाफ हैं। ट्रंप के सलाहकारों का मानना है कि अगर ईरान पहले अमेरिका पर पलटवार करता है, तो अमेरिकी जनता के बीच सैन्य हमले के लिए व्यापक जनसमर्थन जुटाना संभव होगा। इसी राजनीतिक नफा-नुकसान को ध्यान में रखते हुए इजरायल को ढाल बनाने की योजना बनाई जा रही है।

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जेनेवा वार्ता और सैन्य दबाव का तालमेल

यह विस्फोटक रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब जेनेवा में अमेरिका(Trump) और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत का दौर चल रहा है। एक तरफ ट्रंप प्रशासन कूटनीतिक समाधान का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ इराक युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा मिडिल ईस्ट में किया गया है। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान उनकी शर्तों पर डील नहीं करता है, तो उसे “बहुत बुरी चीजों” का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका और इजरायल का यह संभावित साझा हमला न केवल ईरान के परमाणु ठिकानों को बल्कि वहां की सत्ता संरचना को भी निशाना बना सकता है।

अमेरिका सीधे हमला करने के बजाय इजरायल को पहले आगे क्यों करना चाहता है?

इसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय कानून और घरेलू राजनीति है। अगर इजरायल पहले हमला करता है, तो अमेरिका इसे इजरायल के बचाव या ईरानी जवाबी हमले के विरुद्ध अपनी सुरक्षा के तौर पर दुनिया के सामने रख सकता है। इससे अमेरिका पर ‘हमलावर’ होने का ठप्पा नहीं लगेगा और देश के भीतर भी युद्ध का विरोध कम होगा।

क्या ईरान और अमेरिका के बीच जेनेवा में चल रही बातचीत का कोई नतीजा निकल सकता है?

फिलहाल कूटनीति और युद्ध की धमकियां(Trump) साथ-साथ चल रही हैं। ट्रंप प्रशासन ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (अत्यधिक दबाव) की नीति अपना रहा है। यदि ईरान कड़े प्रतिबंधों और सैन्य घेराबंदी के डर से झुक जाता है, तो डील संभव है; अन्यथा रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए मानसिक रूप से तैयार हो चुका है।

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