नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा ब्रांडेड दवाओं (Branded Medicine) और उनके घटकों पर 100 फीसदी आयात शुल्क लगाने के फैसले ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है। ईरान के साथ बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच इस कदम को एक सख्त आर्थिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, भारत के लिए राहत की बात यह है कि इस फैसले का सीधा असर भारतीय दवा उद्योग पर पड़ने की संभावना बेहद कम है।
ब्रांडेड दवाओं पर केंद्रित है फैसला
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का यह टैरिफ मुख्य रूप से ब्रांडेड दवाओं और उनके कच्चे माल पर लागू होगा। इसका प्रभाव उन्हीं देशों और कंपनियों पर पड़ेगा जो महंगी ब्रांडेड दवाओं के निर्माण और व्यापार से जुड़े हैं।
भारत को क्यों नहीं होगा नुकसान
इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि भारत को इस फैसले से घबराने की जरूरत नहीं है। भारतीय दवा उद्योग की ताकत जेनेरिक दवाओं में है, जो किफायती और प्रभावी होती हैं। अमेरिका (America) अपनी जरूरतों के लिए भारत से बड़ी मात्रा में जेनेरिक दवाओं का आयात करता है, जो इस टैरिफ के दायरे में नहीं आतीं।

जेनेरिक दवाओं की वैश्विक मांग
भारतीय जेनेरिक दवाएं गुणवत्ता और असर के मामले में ब्रांडेड दवाओं के बराबर होती हैं, लेकिन उनकी कीमत काफी कम होती है। यही कारण है कि अमेरिका समेत कई देशों के स्वास्थ्य तंत्र में इनकी बड़ी भूमिका है और इन पर निर्भरता भी अधिक है।
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वैश्विक फार्मा कंपनियों पर पड़ेगा असर
विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला वैश्विक ब्रांडेड फार्मा कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है। वहीं, भारतीय दवा उद्योग अपनी जेनेरिक विशेषज्ञता के कारण इस आर्थिक झटके से काफी हद तक सुरक्षित नजर आ रहा है। कुल मिलाकर, ट्रंप का यह टैरिफ कदम वैश्विक स्तर पर असर जरूर डालेगा, लेकिन भारत के फार्मा सेक्टर के लिए स्थिति फिलहाल स्थिर और संतुलित बनी हुई है।
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