USA- ट्रंप बोले- बच्चियों के स्कूल पर बमबारी में अमेरिका का हाथ नहीं

By Anuj Kumar | Updated: March 8, 2026 • 12:54 PM

वाशिंगटन । मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में एक प्राथमिक स्कूल पर बमबारी की खबर ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। इस हमले में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हो गई। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक यह हमला उस समय हुआ जब (United States) और Israel ने (Iran) पर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। हमले के बाद सामने आई तस्वीरों और वीडियो ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हिला दिया। कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए सवाल उठाया कि आखिर जंग की आग बच्चों के स्कूल तक कैसे पहुंच गई।

ट्रंप का बयान बना विवाद का कारण

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जब इस हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति (Donald Trump) से सवाल किया गया तो उनका जवाब भी विवादों में घिर गया। ट्रंप ने कहा कि उनके पास मौजूद जानकारी के मुताबिक यह हमला ईरान ने खुद किया है। हालांकि शुरुआती जांच और कुछ अमेरिकी अधिकारियों के बयान ट्रंप के इस दावे से अलग कहानी बताते हैं। इसी कारण उनके बयान पर कई सवाल उठ रहे हैं और आलोचकों का कहना है कि जंग के बीच सच्चाई को लेकर भ्रम पैदा किया जा रहा है।

हमले में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत

रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में कम से कम 168 लोगों की मौत हुई है, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चियां शामिल हैं। इस घटना ने दुनिया भर में आक्रोश पैदा कर दिया है और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है। शुरुआती संकेतों में यह भी कहा गया है कि हमले में इस्तेमाल किया गया हथियार अमेरिकी मूल का हो सकता है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर इस हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है।

अमेरिकी ऑपरेशन पर भी उठे सवाल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने एक बंद कमरे में हुई बैठक में सांसदों को बताया कि जिस समय यह हमला हुआ, उस समय अमेरिकी सेना उसी इलाके में ऑपरेशन चला रही थी जहां यह स्कूल स्थित है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस हमले में Israel की कोई भूमिका नहीं थी। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

ब्रिटेन की सैन्य तैयारी पर भी बयान

इस विवाद के बीच एक और मोड़ तब आया जब United Kingdom ने मध्य पूर्व में अपने विमानवाहक पोत को तैनात करने की तैयारी दिखाई। Royal Navy का विमानवाहक पोत HMS Prince of Wales इस मिशन के लिए तैयार किया जा रहा था। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका को इस जंग में ब्रिटेन की मदद की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर मदद करनी थी तो दो हफ्ते पहले करनी चाहिए थी, अब इसकी आवश्यकता नहीं है।

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जांच के नतीजों पर टिकी दुनिया की नजर

फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और अमेरिकी प्रशासन भी आंतरिक जांच कर रहा है। शुरुआती संकेतों में कहा गया है कि हमले में अमेरिकी हथियार के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि जांच में यह साबित होता है तो यह अमेरिका के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन सकता है। वहीं ईरान भी इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहा है, जिससे आने वाले दिनों में यह मामला वैश्विक राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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