International: भारतीय मूल के दिग्गज ब्रिटिश उद्योगपति लॉर्ड Swaraj Paul का निधन

By digital | Updated: August 22, 2025 • 12:31 PM

भारतीय मूल के प्रसिद्ध ब्रिटिश उद्योगपति और परोपकारी लॉर्ड स्वराज पॉल (Swaraj Paul) का 21 अगस्त 2025 को लंदन में 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। अपनी कठोर मेहनत और व्यापारिक कुशाग्रता के दम पर उन्होंने न केवल वैश्विक व्यापार जगत में अपनी पहचान बनाई, बल्कि भारत-ब्रिटेन संबंधों को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

परिचय

लॉर्ड स्वराज पॉल का जन्म 18 फरवरी 1931 को पंजाब के जालंधर में हुआ था। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल करने के बाद, वे 1960 के दशक में अपनी बेटी अंबिका के कैंसर के इलाज के लिए ब्रिटेन चले गए। अंबिका की चार साल की उम्र में मृत्यु के बाद, उन्होंने उनकी स्मृति में अंबिका पॉल फाउंडेशन की स्थापना की, जो बच्चों और युवाओं के कल्याण के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य पहलों को बढ़ावा देती है।

1968 में उन्होंने कैपारो ग्रुप की नींव रखी, जो स्टील और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक वैश्विक समूह बन गया, जिसका कारोबार ब्रिटेन, उत्तरी अमेरिका, भारत और मध्य पूर्व में फैला हुआ है। उनकी संपत्ति को 2025 में ‘संडे टाइम्स रिच लिस्ट’ में 2 बिलियन पाउंड आंका गया, और वे 81वें स्थान पर थे।

इंडो-ब्रिटिश एसोसिएशन की स्थापना

लॉर्ड पॉल ने 1975 में इंडो-ब्रिटिश एसोसिएशन की स्थापना की और 1996 में हाउस ऑफ लॉर्ड्स में लाइफ पीयर बने। 1983 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। उनकी परोपकारी गतिविधियों में लंदन जू और वॉल्वरहैम्पटन विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों को महत्वपूर्ण दान शामिल हैं। हाल ही में, उन्होंने अपनी पत्नी अरुणा की स्मृति में लंदन के इंडियन जिमखाना क्लब में लेडी अरुणा स्वराज पॉल हॉल का उद्घाटन किया था।

उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, “श्री स्वराज पॉल जी के निधन से गहरा दुख हुआ। उद्योग, परोपकार और सार्वजनिक सेवा में उनके योगदान और भारत के साथ घनिष्ठ संबंधों के लिए उनका अटूट समर्थन हमेशा याद रहेगा।”

लॉर्ड स्वराज पॉल का निधन न केवल भारतीय डायस्पोरा के लिए, बल्कि वैश्विक व्यापार और परोपकार के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति है। क्या उनका यह मानवीय और परोपकारी चेहरा दुनिया को प्रेरित करता रहेगा, या उनकी विरासत समय के साथ धुंधली पड़ जाएगी? यह एक ऐसी पहेली है, जिसका जवाब भविष्य देगा। उनकी कहानी एक साधारण भारतीय से वैश्विक मंच पर ‘मैन ऑफ स्टील’ बनने की प्रेरणादायक गाथा है।

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