Latest Hindi News : Bengladesh-बांग्लादेश में भड़की हिंसा, अखबारों के दफ्तरों पर हमला

By Anuj Kumar | Updated: December 19, 2025 • 11:18 AM

ढाका। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में गुरुवार देर रात भयानक हिंसा भड़क उठी। 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता और इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी (Sharif Usman Hadi) की सिंगापुर में मौत की खबर सामने आते ही भीड़ ने कई जगह आगजनी शुरू कर दी। ढाका के अलग-अलग इलाकों में उग्र प्रदर्शन हुए, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए।

धानमंडी-32 इलाके में बढ़ा तनाव

उस्मान हादी की मौत के बाद धानमंडी-32 इलाके में भी हिंसा भड़क गई। यह इलाका देश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान (Sheikh Mujibur Rahman) के पैतृक घर के लिए जाना जाता है। गुरुवार रात बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे लगाते हुए आगजनी करते नजर आए। इस दौरान कई लोगों ने देश की मौजूदा स्थिति और शेख हसीना को लेकर मुहम्मद यूनुस पर भी नाराजगी जताई।

अखबारों के दफ्तरों को बनाया निशाना

प्रदर्शनकारियों ने गुस्से में देश के दो प्रमुख अखबारों के दफ्तरों पर हमला कर दिया। पहले बंगाली भाषा के एक बड़े दैनिक अखबार के कार्यालय में तोड़फोड़ की गई और फिर आग लगा दी गई। इसके बाद अंग्रेजी अखबार द डेली स्टार के कार्यालय को भी निशाना बनाया गया।

डेली स्टार कार्यालय में फंसे पत्रकार

द डेली स्टार के कार्यालय पर हमले के बाद करीब चार घंटे तक कम से कम 25 पत्रकार अंदर फंसे रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार आधी रात गुस्साई भीड़ ने अखबार के दफ्तर पर धावा बोला। एक अन्य अखबार के कार्यालय में ग्राउंड फ्लोर (Ground floor) और पहली मंजिल में भारी तोड़फोड़ के बाद करीब 12:30 बजे आग लगा दी गई। आग तेजी से फैल गई और दो मंजिलें इसकी चपेट में आ गईं।

दमकल को पहुंचने में हुई देरी

अखबार के पत्रकारों ने बताया कि दमकल विभाग की गाड़ियां काफी देर तक मौके पर नहीं पहुंच सकीं, क्योंकि उग्र भीड़ ने रास्ता रोक रखा था। आग से उठते घने धुएं का गुबार दूर तक दिखाई दे रहा था।

छत पर रातभर फंसे रहे पत्रकार

आग और धुएं के बीच फंसे पत्रकारों ने जान बचाने के लिए पूरी रात छत पर शरण ली। वे फोन कॉल और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मदद की गुहार लगाते रहे। एक महिला रिपोर्टर ने संदेश भेजते हुए लिखा कि वह सांस नहीं ले पा रही हैं और इमारत के भीतर फंसी हुई हैं।

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सेना की तैनाती, सुबह 4 बजे रेस्क्यू

स्थिति बेकाबू होते देख सेना को तैनात किया गया। सुबह करीब 4 बजे सैनिकों की निगरानी में पत्रकारों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस दौरान भीड़ से बातचीत करने पहुंचे पत्रकारों पर भी हमले की खबर सामने आई।

अखबारों पर क्यों भड़की भीड़?

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन अखबारों ने भारत-समर्थक और शेख हसीना के प्रति नरम रुख अपनाया है। शेख हसीना 2024 के छात्र आंदोलन के बाद भारत में शरण लिए हुए हैं। शरीफ उस्मान हादी भारत और हसीना के कट्टर आलोचक थे और आगामी चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में उतरने वाले थे।

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