ढाका । बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए आज, गुरुवार को आम चुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू हो गई है। अगस्त 2024 में हुए व्यापक जन-आक्रोश और शेख हसीना सरकार के पतन के बाद यह देश का पहला आम चुनाव है। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। शाम साढ़े 4 बजे तक चलने वाले इस मतदान (Vote) को 2009 के बाद देश का पहला असली मुकाबला माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सत्ताधारी अवामी लीग की अनुपस्थिति के बीच मुख्य विपक्षी दलों के बीच सीधी टक्कर है।
12 करोड़ से अधिक मतदाता, 299 सीटों पर वोटिंग
लगभग 17 करोड़ की आबादी वाले इस देश में 12 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के योग्य हैं। संसद की 300 सीटों में से 299 सीटों पर वोटिंग हो रही है, जिसके लिए कुल 1,981 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
यूनुस सरकार का निष्पक्ष चुनाव का दावा
नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस (Mohammad Yunush) के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने चुनाव को पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने का संकल्प दोहराया है।
84-सूत्री सुधार पैकेज पर भी जनमत संग्रह
खास बात यह है कि इस बार चुनाव के साथ-साथ एक जटिल 84-सूत्री सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी कराया जा रहा है, जो देश के भविष्य की संवैधानिक दिशा तय करेगा।
बीएनपी बनाम जमात-ए-इस्लामी : सीधी टक्कर
इस चुनाव में मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और उसके पूर्व सहयोगी दल जमात-ए-इस्लामी के बीच देखा जा रहा है। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को पिछले साल भंग किए जाने के कारण वह इस दौड़ से बाहर है।
जमात का चौंकाने वाला कदम, हिंदू उम्मीदवार मैदान में
जमात-ए-इस्लामी ने इस बार अपनी पारंपरिक छवि से इतर एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए अपने इतिहास में पहली बार एक हिंदू उम्मीदवार, कृष्णा नंदी को खुलना-1 सीट से मैदान में उतारा है। जमात के अमीर शफीकुर रहमान ने सुबह मणिपुर हाई स्कूल पोलिंग सेंटर पर अपना वोट डाला। वे जमीनी स्तर पर व्यापक प्रचार के बाद अब देश की पहली इस्लामिस्ट सरकार के नेतृत्व का सपना देख रहे हैं।
बीएनपी के लिए भावनात्मक चुनाव, तारिक रहमान की वापसी
दूसरी ओर, बीएनपी के लिए यह चुनाव भावनात्मक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। पार्टी के शीर्ष नेता तारिक रहमान करीब 17 साल के निर्वासन के बाद स्वदेश लौटे हैं। अपनी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन के बाद उन्होंने पार्टी की कमान संभाली है। ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ के नारे के साथ वे प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल दावेदार बनकर उभरे हैं।
ओपिनियन पोल में बीएनपी आगे, जमात कड़ी टक्कर में
ओपिनियन पोल्स की बात करें तो दिसंबर 2025 में आए इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट के सर्वे में बीएनपी को 33 प्रतिशत समर्थन के साथ सबसे आगे दिखाया गया है, जबकि जमात 29 प्रतिशत के साथ उसे कड़ी टक्कर दे रही है।
भारत से रिश्तों पर जमात का नरम रुख
चुनाव की पूर्व संध्या पर भारत के साथ संबंधों को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने स्पष्ट किया कि सत्ता में आने पर उनकी प्राथमिकता भारत के साथ सम्मानजनक और पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंध बनाने की होगी। उन्होंने कहा कि भारत निकटतम पड़ोसी होने के नाते उनकी प्राथमिकता बना रहेगा।
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नतीजों पर टिकीं देश-दुनिया की नजरें
अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शाम तक होने वाली इस वोटिंग के बाद बांग्लादेश की जनता सत्ता की चाबी किसके हाथ में सौंपती है।
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