Denmark Strait : दुनिया के सबसे बड़े जलप्रपात का नाम सुनते ही लोगों के मन में नायग्रा जलप्रपात आता है। लेकिन असली सबसे बड़ा जलप्रपात समुद्र के नीचे छिपा हुआ है। इस अद्भुत जलप्रपात को डेनमार्क स्ट्रेट कैटरैक्ट कहा जाता है। यह आर्कटिक महासागर में ग्रीनलैंड और आइसलैंड के बीच स्थित है। सामान्य जलप्रपातों की तरह इसमें पानी हवा से नीचे नहीं गिरता, बल्कि समुद्र के भीतर ही बहाव बनता है।
यह जलप्रपात समुद्र के पानी के तापमान और घनत्व में अंतर के कारण बनता है। आर्कटिक से आने वाला ठंडा और भारी पानी, अटलांटिक महासागर के गर्म पानी के नीचे तेजी से बहता हुआ गहराई में उतर जाता है। समुद्र के भीतर मौजूद पहाड़ी जैसी संरचनाओं के ऊपर से यह पानी हजारों फीट नीचे गिरता है। इसी वजह से इसे समुद्र के नीचे का जलप्रपात कहा जाता है।
इस जलप्रवाह की ताकत बेहद विशाल है। यह हर सेकंड लगभग बत्तीस लाख घन मीटर पानी नीचे की ओर धकेलता है। यह मात्रा अमेजन नदी के प्रवाह से भी ज्यादा मानी जाती है। डेनमार्क स्ट्रेट कैटरैक्ट धरती की जलवायु को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन नामक समुद्री प्रणाली का अहम हिस्सा है।
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इस समुद्री प्रवाह के जरिए तापमान, ऑक्सीजन और पोषक तत्व पूरी दुनिया के महासागरों में फैलते हैं। खासतौर पर यूरोप (Denmark Strait) के मौसम को संतुलित बनाए रखने में इसका बड़ा योगदान है। वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक क्षेत्र तेजी से गर्म हो रहा है। इसका असर इस विशाल समुद्री जलप्रवाह पर भी पड़ रहा है।
अगर इस प्रवाह की ताकत कम होती है तो यूरोप में अत्यधिक ठंड, तूफानों की दिशा में बदलाव और मौसम संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। बार्सिलोना विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ डेविड अंब्लास के अनुसार ध्रुवीय क्षेत्र समुद्री परिसंचरण प्रणाली का दिल हैं। समुद्र के नीचे बहने वाला यह विशाल जलप्रपात हमारी धरती की जटिल प्राकृतिक व्यवस्था का अनोखा उदाहरण है।
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