नई दिल्ली। देशभर में एक्सप्रेसवे नेटवर्क (Express Network) मजबूत करने के बाद अब भारत सरकार पड़ोसी देशों के साथ सड़क कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में झारखंड के देवघर (Deoghar) स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम को नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर (Pashupatinath Temple) से जोड़ने के लिए एक हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे कॉरिडोर का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद 14 घंटे का सफर महज 2 से 3 घंटे में सिमट जाएगा।
बाबा वैद्यनाथ–पशुपतिनाथ हाई-स्पीड कॉरिडोर का प्रस्ताव
बिहार के सड़क निर्माण मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की पुष्टि करते हुए बताया कि झारखंड से नेपाल तक एक्सप्रेसवे बनाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। यह कॉरिडोर न सिर्फ भारत और नेपाल को जोड़ेगा, बल्कि दो प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच सीधा और तेज संपर्क भी स्थापित करेगा।
बजट में प्राथमिकता, 8,260 करोड़ का आवंटन
बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में सड़क निर्माण के लिए 8,260 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें पशुपतिनाथ–वैद्यनाथ धाम हाई-स्पीड कॉरिडोर को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिससे परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
नेपाल से बिहार होते हुए झारखंड तक जाएगा मार्ग
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे नेपाल की राजधानी काठमांडू से शुरू होकर सुपौल जिले के रास्ते भारत में प्रवेश करेगा। नेपाल के भीतर यह मार्ग भीमनगर और बीरपुर जैसे अहम क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, जिससे दोनों देशों के बीच आवागमन और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।
बिहार के छह जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
करीब 250 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का मार्ग सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, मुंगेर और बांका जिलों से होकर गुजरेगा। इन जिलों के जुड़ने से न सिर्फ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलेगी। अंतिम पड़ाव झारखंड का देवघर जिला होगा, जहां बाबा वैद्यनाथ धाम स्थित है।
14 घंटे की यात्रा अब 3 घंटे में
वर्तमान में बाबा वैद्यनाथ धाम से पशुपतिनाथ मंदिर की दूरी लगभग 534 किलोमीटर है, जिसे तय करने में सड़क मार्ग से 13 से 14 घंटे लगते हैं। एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी घटकर करीब 250 किलोमीटर रह जाएगी और यात्रा समय महज 2 से 3 घंटे का होगा।
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केंद्र की मंजूरी का इंतजार
बिहार सरकार ने इस परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। सड़क निर्माण मंत्री के अनुसार, भारत-नेपाल सीमा पर अब तक 554 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि यह ऐतिहासिक एक्सप्रेसवे परियोजना अगले 5 वर्षों में धरातल पर उतर सकती है। यह कॉरिडोर धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक संबंधों और भारत-नेपाल सहयोग को नई मजबूती देने वाला साबित हो सकता है।
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