Assam- असम में 2.43 लाख वोटरों के नाम हटे, आदिवासी इलाकों में गिरावट

By Anuj Kumar | Updated: February 12, 2026 • 12:10 PM

गुवाहाटी,। असम में विशेष पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के समापन के बाद मंगलवार को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है। नई सूची में बड़े पैमाने पर फेरबदल देखने को मिला है। मसौदा सूची की तुलना में कुल 2.43 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 0.97 प्रतिशत है।

35 जिलों में 24 में घटे, 11 में बढ़े मतदाता

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, असम के 35 जिलों में से 24 जिलों में मतदाताओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि 11 जिलों में मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

मुस्लिम बहुल जिलों में बढ़े वोटर

आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया है कि राज्य के अधिकांश मुस्लिम-बहुल जिलों में मसौदा सूची की तुलना में अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़ी है।

आदिवासी और बोडोलैंड क्षेत्रों में दर्ज हुई गिरावट

इसके विपरीत, बहुसंख्यक आदिवासी आबादी वाले तीन पहाड़ी जिलों और बोडोलैंड (Bodoland) प्रादेशिक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच जिलों में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।

कामरूप और गुवाहाटी मेट्रो में भी कम हुए मतदाता

कामरूप और गुवाहाटी शहर वाले कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) जिलों में भी अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है।

त्रुटिरहित सूची के लिए किया गया गहन काम-निर्वाचन अधिकारी

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल ने कहा कि अधिकारियों ने त्रुटिरहित मतदाता सूची सुनिश्चित करने के लिए गहनता से काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान इस तरह की कमी सामान्य बात है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की तीखी प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह तो केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में और भी संदिग्ध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाएंगे।

भाजपा कार्यकर्ताओं की भूमिका पर सीएम की सराहना

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि तमाम डराने-धमकाने और धमकियों के बावजूद भाजपा कार्यकर्ताओं ने संदिग्ध नामों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं, जिसका असर इस सूची में दिख रहा है।

मुख्यमंत्री के क्षेत्र जलुकबाड़ी में भी बड़ी कटौती

दिलचस्प बात यह है कि स्वयं मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र जलुकबाड़ी में भी मतदाताओं की संख्या में बड़ी कमी आई है। यहां करीब 2.11 लाख मतदाताओं में से 4,310 नाम हटाए गए हैं।

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जलुकबाड़ी में 2.05 प्रतिशत वोटरों के नाम हटे

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मसौदा सूची में 2,10,624 नाम थे, जो अब घटकर 2,06,314 रह गए हैं। हटाए गए नामों में 2,754 पुरुष, 1,555 महिलाएं और एक तृतीय लिंग मतदाता शामिल है।

पारदर्शिता बढ़ाने का दावा, राजनीतिक बहस तय

चुनाव आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया से राज्य की लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, हालांकि आदिवासी और मैदानी इलाकों के बीच मतदाता आंकड़ों का यह अंतर आने वाले समय में राजनीतिक बहस का मुद्दा बन सकता है।

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