Latest Hindi News : एसिड अटैक पीड़ितों को दिव्यांग वर्ग में रखा जाए- सुप्रीम कोर्ट

By Anuj Kumar | Updated: December 12, 2025 • 1:54 PM

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने केंद्र सरकार से दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम में संशोधन करने पर विचार करने को कहा ताकि अपराधियों के तेजाब हमले के पीड़ितों को ‘‘दिव्यांगजन’’ की श्रेणी में शामिल किया जा सके और उन्हें कल्याणकारी उपायों का लाभ मिल सके।

सरकार ने जताई बदलाव की सहमति

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Tushar Mehta) ने कहा कि सरकार कानून में बदलाव पर विचार करने को तैयार है और उन्हें खुद इस अपराध के उस पहलू की जानकारी नहीं थी। पीठ ने अपने आदेश में कहा, भारत सरकार याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों पर विचार करे… सॉलिसिटर जनरल का कहना है कि याचिका में उठाए गए सभी मुद्दों पर विचार किया जाएगा और एक उपयुक्त नीतिगत ढांचा तैयार किया जाएगा।

तेजाब हमले के मामलों में तेजी लाने का निर्देश

पीठ ने जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय (Ladakh High Court) को अपने अधिकार क्षेत्र में लंबित तेजाब हमले के सभी पांच मामलों में सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया। यह बताए जाने पर कि तेजाब हमले के पीड़ितों को राज्य सरकारों से मुआवजे के रूप में तीन लाख रुपये से अधिक नहीं मिलते हैं, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वह इस पहलू पर गौर करेंगे।

पीड़िता की याचिका पर सुनवाई जारी

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने तेजाब हमले की पीड़िता शाहीन मलिक द्वारा दायर एक जनहित याचिका में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पक्षकार बनाया है। इससे पहले पीठ ने चार दिसंबर को सभी उच्च न्यायालयों की रजिस्ट्रियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में लंबित तेजाब हमलों के मामलों का ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया था।

दिव्यांग श्रेणी विस्तार की मांग

मलिक ने अपनी याचिका में कानून के तहत दिव्यांगजन की परिभाषा का विस्तार करने का अनुरोध किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि तेजाब हमले के कारण आंतरिक अंगों की गंभीर क्षति झेलने वाले पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा, चिकित्सा देखभाल और अन्य राहतें मिल सकें

सुप्रीम कोर्ट में कितने ब्राह्मण जज हैं?

2023 की नियुक्तियों के साथ, ऐसा प्रतीत होता है कि वर्तमान 33 न्यायाधीशों (न्यायालय का 36.4 प्रतिशत) में से कम से कम 12 ब्राह्मण समुदायों से आते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, ब्राह्मण भारत की जनसंख्या का लगभग पाँच प्रतिशत हैं।

सुप्रीम कोर्ट में ब्राह्मण कितने जज हैं?

सर्वोच्च न्यायालय के 33 न्यायाधीशों में से 12 ब्राह्मण समुदाय से हैं, जो भारतीय जनसंख्या का 4-5% है, जबकि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के केवल 4 न्यायाधीश हैं, जो भारतीय जनसंख्या का 60.53% हैं। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों को सक्षम और निष्पक्ष माना जाता है

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