नई दिल्ली । केंद्र सरकार बच्चों और किशोरों द्वारा सोशल मीडिया (Social Media) के बढ़ते इस्तेमाल और उससे जुड़े जोखिमों को देखते हुए नए दिशा-निर्देश तैयार करने पर विचार कर रही है। सरकार का उद्देश्य पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय एक ऐसा संतुलित मॉडल तैयार करना है, जिसमें उम्र के आधार पर सोशल मीडिया तक पहुंच और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उम्र के आधार पर तय होगी सोशल मीडिया पहुंच
सरकार ऐसे नियमों पर काम कर रही है, जिनमें अलग-अलग आयु वर्ग के लिए अलग स्तर की एक्सेस तय की जा सके। इस मुद्दे पर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ लगातार चर्चा जारी है।
पेरेंटल कंट्रोल और स्क्रीन टाइम पर फोकस
प्रस्तावित नियमों में अभिभावकों के नियंत्रण (पेरेंटल कंट्रोल) (Parental Control) को मजबूत करने, बच्चों के स्क्रीन टाइम की सीमा तय करने और कुछ संवेदनशील फीचर्स पर रोक लगाने जैसे सुझाव शामिल हैं।
उम्र सत्यापन की नई तकनीक पर विचार
फिलहाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उम्र की जांच के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, जिससे बच्चे गलत जानकारी देकर आसानी से अकाउंट बना लेते हैं। इसे रोकने के लिए सरकार उन्नत और तकनीकी रूप से मजबूत पहचान प्रणाली लागू करने पर विचार कर रही है।
13 या 16 साल—क्या होगी न्यूनतम उम्र सीमा?
अब तक यह तय नहीं हुआ है कि सोशल मीडिया उपयोग के लिए न्यूनतम आयु 13 वर्ष रखी जाए या इसे बढ़ाकर 16 वर्ष किया जाए। इस पर विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से राय ली जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में लागू करना चुनौती
इस योजना को लागू करने में सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में देखी जा रही है, जहां अक्सर एक ही मोबाइल फोन पूरे परिवार द्वारा उपयोग किया जाता है। ऐसी स्थिति में उपयोगकर्ता की सही उम्र पहचानना मुश्किल हो सकता है।
प्राइवेसी और डिजिटल पहुंच पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उम्र सीमा 16 या 18 वर्ष तय की जाती है, तो इससे डिजिटल (Digital) पहुंच सीमित हो सकती है और प्राइवेसी से जुड़े नए कानूनी सवाल भी खड़े हो सकते हैं।
बच्चों की सुरक्षा है सरकार की प्राथमिकता
सरकार का मुख्य उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन हानिकारक सामग्री और साइबर खतरों से सुरक्षित रखना है। इसके लिए आईटी नियमों में जरूरी संशोधन कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय की जा सकती है।
अन्य पढ़े: बीजेपी का घोषणापत्र – 5 लाख करोड़ निवेश और ‘जमीन जिहाद’ पर रोक का वादा
विचार-विमर्श के बाद होगा अंतिम फैसला
फिलहाल सभी संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जा रहे हैं और व्यापक चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा, ताकि डिजिटल सुरक्षा और सूचना तक पहुंच के बीच संतुलन बनाया जा सके।
Read More :