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National- जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को उम्रकैद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Author Icon By Anuj Kumar
Updated: April 6, 2026 • 3:52 PM
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बिलासपुर । छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड (The much-discussed Ram Avatar Jaggi murder case) में अहम फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 1000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 78 पेज के विस्तृत फैसले में यह आदेश दिया।

निचली अदालत का फैसला पलटा

हाईकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए अमित जोगी उर्फ अमित ऐश्वर्या जोगी (Amit Jogi alias Amit Aishwarya Jogi) को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई और जुर्माना न भरने की स्थिति में 6 महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतने का निर्देश दिया।

सीबीआई की अपील स्वीकार

अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। वहीं, शिकायतकर्ता सतीश जग्गी की पुनरीक्षण याचिका का भी निपटारा किया गया। कोर्ट ने कहा कि 4 अप्रैल 2024 के फैसले में अन्य आरोपियों की सजा पहले ही बरकरार रखी जा चुकी है, इसलिए यह याचिका निष्प्रभावी हो गई है और इसे खारिज किया जाता है।

तीन हफ्ते में सरेंडर का निर्देश

फैसले में कहा गया है कि अमित जोगी फिलहाल जमानत पर हैं और उनकी जमानत तीन सप्ताह तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि के भीतर उन्हें संबंधित ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करना होगा। ऐसा न करने पर अदालत उन्हें हिरासत में लेकर सजा पूरी करने के लिए जेल भेजने का आदेश देगी।

सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प खुला

हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि फैसले की प्रति आरोपी को उपलब्ध कराई जाए और उन्हें यह जानकारी दी जाए कि वे इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं, चाहे वह स्वयं या कानूनी सहायता के माध्यम से हो।

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बहुचर्चित हत्याकांड का मामला

गौरतलब है कि 4 जून 2023 को एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने 31 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें से दो—बलटू पाठक और सुरेंद्र सिंह—सरकारी गवाह बन गए थे। पहले अमित जोगी को छोड़कर अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था, जबकि बाद में उन्हें बरी कर दिया गया था। अब हाईकोर्ट के इस फैसले ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।

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